लॉकडाउन के चलते राज्य में कई किसानों की आय पूरी तरह से ठप हो गई है. ऐसे में पीएम किसान योजना का लाभ ऐसे लोगों को मिल रहा है, जो फर्जी तरीके से रजिस्टर्ड हैं. ज्यादातर किसानों की हालत लॉकडाउन के चलते बेहद खराब है. राज्य के अलग-अलग हिस्सों से किसान आरोप लगा रहे हैं जरूतमंद किसानों को पीएम किसान योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है, वहीं कुछ लोग गलत तरीके से पीएम किसान योजना का लाभ पा रहे हैं.
एक सरकारी विज्ञप्ति में यह कहा गया है कि स्कीम में हो रही धांधली के आरोपों पर सीएम ने हर जिले के सभी डिप्टी कमिश्नर को निर्देश दिया है कि वे लाभार्थियों को चिन्हित करें, पुष्टि करें और ही लोगों तक मदद पहुंचाई जाए.
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बैंक विवरण की भी हो जांच
अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे बैंक खातों के विवरण की जांच करें, साथ ही डुप्लीकेट डेटा एंट्री की भी जांच करें. अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि ग्रामीण स्तर पर लाभार्थियों की लिस्ट तैयार की जाए, इसकी जिम्मेदारी सर्किल ऑफिसर की होगी. जो भी खाते संदिग्ध लगें, उनकी लिस्ट तैयार की जाए और एक्शन लिया जाए.
जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच रही मदद
असम के नगांव जिले के कामपुर गांव के रहने वाले विनोद बोरा नाम के एक किसान ने आज तक से बातचीत करते हुए कहा, 'अन्य किसानों की तरह मेरा नाम भी पीएम किसान योजना की लिस्ट से गायब था. वहीं ग्राम पार्षद, वार्ड सदस्यों के नाम लिस्ट में शामिल हैं. असली किसानों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है.' असम में कुल 39 लाख लोग पीएम किसान योजना का लाभ ले रहे हैं. असम में कुल 28 लाख किसान हैं, जो 26,000 गांवों में रहते हैं.
7 लाख लोग होंगे चिन्हित
असम के कृषि मंत्री ने भी किसान योजना में धांधली की बात स्वीकार की है. कृषि मंत्री अतुल बोरा ने कहा है कि राज्य में कई ऐसे किसान हैं, जो पीएम किसान योजना का लाभ नहीं पा रहे हैं. उन्होंने कहा, 'हमने पहले ही चिन्हित कर लिया है कि 7 लाख लोग इस योजना का लाभ गलत तरीके से उठा रहे हैं. केंद्र सरकार ने हमें 5 फीसदी रि-वेरीफिकेशन के लिए कहा है. हम 100 फीसदी वेरीफाई करेंगे.'
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मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य के कृषि विभाग ने विभाग के कुछ अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है, जिनमें जिला कृषि अधिकारी भी शामिल हैं. इस मामले में कृषि विभाग ने कई लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है.
क्या है पीएम किसान योजना?
पीएम किसान केंद्र सरकार की पहल है, जिसकी घोषणा 2019 में की गई. इस स्कीम के तहत देश के किसानों को 6,000 रुपये हर साल सरकारी मदद के तौर पर मिलते हैं. यह राशि सीधे किसानों की के खाते में ट्रांसफर की जाती है.