बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली को एक चिट्ठी लिखकर 14वें वित्त आयोग की सिफारिशों से होने वाले नुकसान का ब्योरा पेश किया है. नीतीश ने होने वाले नुकसान की भरपाई करने की मांग की है.
विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग
सीएम नीतीश ने केंद्र सरकार से एक बार फिर बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग दोहराई है. विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग दोहराते हुए कहा गया है कि बिहार के विकास के लिए निजी निवेश जरूरी है. विशेष दर्जा में निवेशकों को कई तरह के करों में छूट मिलेगी. पत्र में कहा गया है कि बिना विशेष राज्य का दर्जा मिले यहां पूंजी निवेश संभव नहीं है.
नीतीश ने अपने पत्र में लिखा है कि केन्द्र सरकार बिहार के विकास के लिए प्रतिबद्ध है, यह खुशी की बात है, परंतु केन्द्र द्वारा केन्द्रीय सहायता में कटौती की जा रही है.
पेश किया नुकसान का ब्योरा
पत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि 14वें वित्त आयोग के तहत 32 से 42 फीसदी हिस्सेदारी के बावजूद बिहार को 10.92 फीसदी के बदले 9.67 फीसदी ही हिस्सेदारी मिलेगी. पिछड़ेपन, बुनियादी सुविधा व प्रति व्यक्ति आमदनी को दरकिनार कर अन्य मानदंडों पर हिस्सेदारी तय होने से 2015-2020 की अवधि में बिहार को 45 हजार 803 करोड़ का नुकसान होगा. उन्होंने इस नुकसान की भरपाई करने की मांग केन्द्र सरकार से की.
पैकेज पर भी की खिंचाई
पत्र में केन्द्र सरकार द्वारा दिए गए 1.25 लाख करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की चर्चा करते हुए लिखा है कि इस पैकेज में अधिकांश पुरानी योजनाओं को ही स्थान दिया गया है. पैकेज में एयरपोर्ट के लिए 2000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जबकि इसके लिए जमीन अधिग्रहण पर ही 10 हजार करोड़ रुपये खर्च हो जाएंगे. पत्र में कहा गया है कि पैकेज में सड़क निर्माण से संबंधित 11 परियोजनाएं पुरानी हैं, जिसे केंद्र सरकार पहले ही स्वीकार कर चुका है.
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले केन्द्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखकर बिहार के विशेष पैकेज की विस्तृत जानकारी दी थी.