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सांप्रदायिक हिंसा में गई बुजुर्ग की जान, दरिंदों ने शव जलाया, प्रशासन ने छुपाया

बिहार के सीतामढ़ी में हुई दरिंदगी की खबर बाहर नहीं आ पाती अगर घटना से जुड़ा कुछ फोटो वायरल न हो गए होते. 

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सीतामढ़ी में हिंसा की वायरल फोटो
सीतामढ़ी में हिंसा की वायरल फोटो

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बिहार के सीतामढ़ी में 20 अक्टूबर को मूर्ति विसर्जन के दौरान दो गुटों के बीच हुई भिड़ंत में एक बुजुर्ग की भी जान गई थी. खास बात ये है कि हालात पर काबू पाने की कवायद के नाम पर प्रशासन ने इस मौत की खबर को भी छुपाए रखा. यहां तक कि उसका अंतिम संस्कार भी उसके परिवार को सीतामढ़ी के बजाय मुजफ्फरपुर में करने के लिए मजबूर किया गया. बुजुर्ग की मौत, उसके शव के साथ दरिंदगी की खबर कभी सामने नहीं आ पाती अगर घटना से जुड़े कुछ फोटो सोशल मीडिया पर वायरल न हुए होते.

गौरतलब है कि 20 अक्टूबर के दिन सीतामढ़ी के मधुबन, मुरलियाचक, गौशाला चौक, नोनिया टोल और राजोपट्टी में तनाव की खबरें आई थीं. उस दिन दो समुदायों के बीच जमकर पत्थरबाजी हुई थी. अब ये पता चला है कि इस पत्थरबाजी में एक बुजुर्ग की जान भी गई थी. यहां तक कि भीड़ ने उसके शव को जलाने की भी कोशिश की थी. मरने वाले की पहचान 68 वर्षीय जैनुल अंसारी के रूप में की गई है. सीतामढ़ी संघर्ष समिति के अध्यक्ष मो. शम्स शाहनवाज ने अब राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग को पत्र लिखकर इस मामले की जांच कर दोषियों को सजा दिलाने की मांग की है.

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तस्वीरों-कपड़ों से की पहचान

मृतक के बड़े पोते बोरहा सबील ने बताया कि उनके दादा रिश्तेदारी में गए थे, उस दिन वो घर लौट रहे थे. शाम तक घर नहीं पहुंचे तो एफआईआर कराई गई. पुलिस के बताने पर परिवार के लोग मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल पहुंचे, वहां एक जली हुई लाश मिली जिसे पहचानना मुश्किल था. तभी ये तस्वीरें परिवार के पास आईं और पता चला कि मृतक उनके परिवार से लापता बुजुर्ग ही हैं. परिवार मृतक को सीतामढ़ी में सुपुर्दे खाक करना चाहता था लेकिन पुलिसवालों के दबाव में 23 अक्टूबर को उन्हें मुजफ्फरपुर में ही दफन करना पड़ा.

दो लोगों की हो चुकी है गिरफ्तारी

सीतामढ़ी के पुलिस अधीक्षक विकास बर्मन का कहना है कि घटना मुरलियाचक के पास गौशाला गेट पर हुई थी. परिवार ने तस्वीरों और कपड़ों के आधार पर शव की पहचान की. आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं. राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष जी. एच. रिजवी के मुताबिक जिलाधिकारी ने बताया कि इस मामले में 2 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और उन्होंने बिहार सरकार के मुख्य सचिव से पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है.

सोशल मीडिया पर वायरल एक और तस्वीर में भीड़ एक दुकान में तोड़फोड़ करती दिख रही है. सीतामढ़ी के रहने वाले अफजल ने बताया कि रात 12.30 के आसपास किसी ने उन्हें बताया कि उनकी दुकान लूट ली गई है. बिहार में त्योहार के मौके पर इस तरह की हिंसा नई नहीं है. इसी साल रामनवमी के मौके पर राज्य के भागलपुर से शुरू हुई सांप्रदायिक हिंसा औरंगाबाद, समस्तीपुर, मुंगेर और नालंदा में फैल गई थी. इन इलाकों में कई दिनों तक धारा 144 लगाई गई थी और इंटरनेट सेवाएं बंद थीं.

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