गुरुग्राम में कथित रूप से करणी सेना के कुछ गुंडों द्वारा स्कूली बच्चों की बस पर हमले करने की तस्वीरें विचलित करने वाली हैं. पद्मावत के विरोध में गुरुग्राम में करणी सेना की गुंडागर्दी का आलम यह है कि उन्होंने एक स्कूल बस में आग भी लगा दी. सिर्फ गुरुग्राम ही नहीं, अहमदाबाद, इलाहाबाद, जयपुर सहित बीजेपी शासित राज्यों के कई शहरों में करणी सेना के उपद्रव की खबरें आई हैं.
करणी सेना का ज्यादातर उग्र प्रदर्शन बीजेपी शासित राज्यों में ही हो रहा है, ऐसे में यह सवाल उठना शुरू हो गया है कि क्या इस कथित सेना की गुंडई से निपटने में बीजेपी की राज्य सरकारें अक्षम साबित हो रही हैं? ऐसे हालात से इन राज्यों में आने वाला निवेश भी प्रभावित हो सकता है.
इस अक्षमता की सबसे बड़ी उदाहरण मनोहर लाल खट्टर की बीजेपी सरकार है. ऐसा लगता है कि हरियाणा में पुलिस नाम की कोई चीज नहीं है. हर किसी को फिर से पिछले साल 25 अगस्त होने वाली हिंसा याद आने लगी है. एक और बीजेपी शासित राज्य गुजरात के अहमदाबाद में भी फिल्म पद्मावत के विरोध को लेकर करणी सेना ने जमकर बवाल काटा है.
गौरतलब है कि चार बीजेपी शासित राज्यों गुजरात, हरियाणा, मध्य प्रदेश और राजस्थान की सरकारों ने पहले खुद ही अपने राज्य में पद्मावत के प्रदर्शन पर बैन लगा दिया था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश और फटकार के बाद इन राज्यों में भी पद्मावत का प्रदर्शन किया जा रहा है. महज चुनावी राजनीति के फायदे के लिए इन सरकारों का खुलकर इस भीड़ के साथ आना चकित करने वाली बात थी. चारों राज्य सरकारों ने तो हाथ खड़े कर लिए थे कि पद्मावत के प्रदर्शन के बाद कानून-व्यवस्था की दिक्कत हुई तो वे कुछ नहीं कर पाएंगे. लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद चारों राज्यों में प्रशासन कुछ खास करता नहीं दिख रहा. ऐसे में कोर्ट को इन राज्यों को सख्ती से सवाल करना होगा कि कानून-व्यवस्था राज्य सरकार का हिस्सा है या नहीं, और वे अपने राज्य की सीमा में शांति-व्यवस्था बनाए रखने में सक्षम हैं या नहीं?
निवेश कम होने का डर
वैसे तो कानून के डर से इन राज्यों का कोई भी सत्तारूढ़ नेता कोई भड़काऊ बयान नहीं दे रहा, लेकिन हर कोई जानता है कि अराजक तत्व काबू से बाहर हैं. दो दिन पहले ही पीएम मोदी दावोस में दुनिया के दिग्गज कारोबारियों को भारत में निवेश का न्योता देकर आए हैं, क्या ऐसा लगता है कि कोई भी समझदार निवेशक बीजेपी शासित इन राज्यों में निवेश करना चाहेगा जो न्यूनतम स्वीकार्य कानून-व्यवस्था भी सुनिश्चित नहीं कर पा रहे हों?
उत्तर भारत के राज्यों में कमजोर बुनियादी ढांचे और कानून-व्यवस्था की समस्या की वजह से पहले से ही निवेश कम होता रहा है. ऐसे में इस तरह के उदाहरण निवेशकों को और हतोत्साहित ही करेंगे. यहां तक कि दक्षिण भारतीय राज्य केरल में हाल में यह देखा गया कि सीपीएम-आरएसस की हिंसा की वजह से वहां अब निवेश पहले की तुलना में घटा है.
उत्तर भारत में पहले से ही गौरक्षक, नैतिकता के ठेकेदार कानून-व्यवस्था की समस्या खड़ी करते रहे हैं. ये लोग भारत की समावेशी छवि को खराब कर रहे हैं. ये लोग सरकारों के ऊपर सवालिया निशान लगाते हैं कि वे आखिर कुछ कर पाने में सक्षम हैं या नहीं?