बीजेपी ने पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी के विरोध में खुलेआम बयानबाजी करने वाले सांसद राम जेठमलानी को 'कारण बताओ' नोटिस भेजा है. जेठमलानी को नोटिस का जवाब देने के लिए 10 दिनों का वक्त दिया गया है.
बीजेपी संसदीय बोर्ड की बैठक में फैसला
पार्टी से निलंबित किए जा चुके राम जेठमलानी को कारण बताओ नोटिस देने का फैसला बीजेपी संसदीय बोर्ड की बैठक में लिया गया. साथ ही बैठक में यशवंत सिन्हा व शत्रुघ्न सिन्हा के खिलाफ फिलहाल कोई कार्रवाई न करने का फैसला किया गया.
जेठमलानी ने गडकरी को पत्र लिखा
दूसरी ओर, राम जेठमलानी ने सोमवार को कहा कि उन्होंने पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी को पत्र लिखा है. हालांकि उन्होंने इसका विवरण देने से इनकार कर दिया. जेठमलानी ने विवादित भूमि सौदों में गडकरी का नाम सामने आने के बाद उसने इस्तीफे की मांग की थी. जेठमलानी ने संवाददाताओं से कहा, 'मैंने पार्टी अध्यक्ष को एक पत्र लिखा है लेकिन इस स्थिति में नहीं हूं कि विवरण का खुलासा कर सकूं.'
पत्र को गुप्त रखने की शपथ
उन्होंने कहा, 'आप इसका विवरण उनसे हासिल कर सकते हैं. मैंने उनसे (बीजेपी से) कह दिया है कि आप इसे प्रेस के लिए जारी कर सकते हैं. जब तक यह पत्र पार्टी अध्यक्ष तक नहीं पहुंच जाता तब तक मैं मामले को गुप्त रखने की शपथ से बंधा हुआ हूं.'
अनुशासन भंग करने का मामला
गौरतलब है कि भाजपा ने रविवार को अनुशासन भंग करने और पार्टी अध्यक्ष के खिलाफ बोलने के कारण जेठमलानी को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलम्बित कर दिया. जेठमलानी ने शनिवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) प्रमुख की नियुक्ति का विरोध करने पर अपनी पार्टी के रवैये की आलोचना की थी. इससे पार्टी को शर्मिंदगी उठानी पड़ी.
उल्लेखनीय है कि बीजेपी नेता अरुण जेटली एवं सुषमा स्वराज ने सिन्हा की नियुक्त पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की आलोचना की थी. बीजेपी नेताओं ने नियुक्ति रद्द कर लोकपाल पर संसद की प्रवर समिति की अनुशंसा के आधार पर करने की मांग की थी.