क्या आप सोच सकते हैं कि देश की सबसे सम्मानित यूपीएससी परीक्षा पास करने के बाद भी किसी को दर दर भटकना पड़ सकता है. आईएएस की परीक्षा पास करने के बाद भी एक शख्स को सिर्फ इसलिए बहाली नहीं दी गई क्योंकि नेत्रहीन के लिए कोई वैकेंसी नहीं थी लेकिन अदालत ने अब उस शख्स को इंसाफ दिया है.
संघर्ष की ये कहानी है एक ऐसे शख्स की, जिसकी आंखों की रोशनी खोई तो हौसला दोगुना हो गया. उसी हौसले की बदौलत रवि प्रसाद गुप्ता नाम के उस शख्स ने आईएएस का इम्तिहान पास किया, लेकिन रवि को नौकरी दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर मिल रही है. हाईकोर्ट ने यूपीएससी को निर्देश दिया है कि रवि को छह हफ्तों के भीतर आईएएस के तौर पर भर्ती किया जाए. इस इंसाफ से रवि और उसका परिवार बेहद खुश है.
16 साल की उम्र में खो गई थी रवि की आंखों की रोशनी लेकिन कड़ी मेहनत करके रवि ने 2006 में आईएएस का इम्तिहान पास किया. बावजूद इसके रवि को नौकरी नहीं मिली. कहा गया कि नेत्रहीनों के कोटे के तहत कोई वैकैंसी नहीं है. रवि ने कैट में गुहार लगाई तो भी कोई फायदा नहीं हुआ. कैट के फैसले के खिलाफ़ रवि ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. आखिरकार कोर्ट से रवि को इंसाफ मिला.
बहरहाल अंत भला तो सब भला. लाख मुसीबतों के बाद भी रवि ने अपना मुकाम हासिल करके साबित कर दिया कि कड़ी मेहनत और कुछ करने का जज्बा मन में हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती.