होली से ठीक एक दिन पहले दिल्ली के जाने माने बिल्डर और बीएसपी नेता दीपक भारद्वाज की हत्या के मामले में दिल्ली पुलिस को शक है कि वारदात को अंजाम देने के लिए कॉन्ट्रेक्ट किलर्स का इस्तेमाल किया गया था.
इस मामले में पुलिस को शक है कि हत्यारों ने या तो रेकी की थी या फिर किसी अंदर के शख्स ने पूरी जानकारी उपलब्ध कराई थी. क्योंकि एक गेट से अंदर घुसना और दूसरे गेट से बाहर निकलना किसी अजनबी के लिए मुमकिन नहीं है.
जिस तरह से गेट पर बैठे गार्ड ने हत्यारों को फॉर्म हाउस में एंट्री दी वो भी पुलिस के माथे पर सिकुड़न पैदा कर रही है, पुलिस गार्ड के मोबाइल नंबरों की जांच भी कर रही है.
दीपक भारद्वाज के पास लाइसेंसी पिस्टल भी है लेकिन सुबह के समय होने के कारण वो उस वक्त उनके पास मौजूद नहीं थी, 2 पीएसओ भी भारद्वाज ने रखे हैं लेकिन वो भी अक्सर सुबह 10 बजे तक आते थे और घटना 9 बजे के करीब हुई.
हत्यारों ने रजिस्टर में 8:55 पर एंट्री की और 9:14 तक वो बाहर निकल गए, पुलिस सीसीटीवी की मदद से बदमाशों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए कई जगह छापे मार रही है. हत्या के पीछे बिजनेस का झगड़ा भी हो सकता है लेकिन अभी तक किसी भी दूसरी पॉसिबिलीटी को रुल आउट नहीं किया गया है.
इससे पहले होली से ठीक एक दिन पहले मंगलवार को द नितेश फार्म हाउस में अज्ञात लोगों ने दीपक भारद्वाज को गोली मारी.
कौन था दीपक भारद्वाज
हाईप्रोफाइल कारोबारी और बीएसपी नेता दीपक भारद्वाज की गोली मारकर हत्या कर दी गई. भारद्वाज पश्चिम दिल्ली में लाजवंती गार्डन में रहते थे. दीपक का जन्म 1951 में हुआ था. 15वीं लोकसभा चुनावो के लिए वो बीएसपी की सीट से पश्चिम दिल्ली से उम्मीदवार थे. उस समय लोकसभा प्रत्याशियों में दीपक सबसे अमीर प्रत्याशी थे क्योंकि उन्होने अपनी संपत्ति में 614 करोड़ रुपये का जिक्र किया था.
62 वर्षीय दीपक भारद्वाज जाने माने करोबारी थे. उनके बिजनेस में रियल स्टेट, द्वारका में स्कूल, रियल स्टेट के तहत हरिद्वार में एक टाउनशिप प्रोजेक्ट और दिल्ली गुड़गांव में उनके होटल भी है. साउथ दिल्ली में उनका अपना फार्म हाउस है जहां उनको गोली मार दी गई.सूत्रों के मुताबिक वह विवादित प्रॉप्रटी खरीदने-बेचना का भी काम करता था.