देश की सरहदों पर तैनात सैनिकों को पर्याप्त मात्रा में कैलरी भी नहीं मिल पा रही है. ये खुलासा भारतीय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी कि CAG ने अपने एक रिपोर्ट में की है. कैग की ये रिपोर्ट सोमवार को संसद में पेश की गई. रिपोर्ट में कहा गया है कि बर्फीले इलाके में तैनात सैनिकों को स्नो बूट (snow boot) न मिल पाने की वजह से सैनिकों को पुराने जूते रिसाइकल कर पहनना पड़ा है.
सेना को बजट की तंगी
कैग ने बताया कि मार्च 2019 में रक्षा मंत्रालय की ओर से दिए गए जवाब में कहा गया है कि बजट की तंगी और आर्मी की जरूरतों में बढ़ोतरी की वजह से जवानों को ये किल्लत हुई. रिपोर्ट में कहा गया है कि 2017 में बर्फीले इलाकों में इस्तेमाल होने वाले कपड़ों और सामान की मांग बढ़कर 64,131 हो गई. इस वजह से सेना मुख्यालय में इन सामानों की कमी हो गई. हालांकि रक्षा मंत्रालय ने कहा कि धीरे-धीरे इन कमियों को पूरा कर लिया जाएगा.
सन ग्लासेज की किल्लत
बता दें कि रक्षा मंत्रालय ने साल 2015-16 से लेकर 2017-18 तक जवानों को सामानों की हुई किल्लत को लेकर पिछले साल मार्च 2019 में सफाई दी थी.
पढ़ें: दिल्ली के दंगल में बोले PM मोदी- शाहीन बाग संयोग नहीं प्रयोग, इस साजिश को रोकना होगा
रक्षा मंत्रालय ने यह भी दावा किया कि सैनिकों को जमीनी स्तर पर सामानों की किल्लत नहीं होने दी गई. हालांकि कैग ने कहा कि रक्षा मंत्रालय द्वारा दी गई सफाई को स्वीकार नहीं किया जा सकता है. कैग ने स्नो गॉगल्स की कमी का जिक्र करते हुए कहा कि इसकी कमी 62 से 98 फीसदी के बीच दर्ज की गई.
रिसाइकल कर पहनना पड़ा जूता
कैग की रिपोर्ट को सोमवार को संसद के दोनों सदनों में पेश किया गया. रिपोर्ट में कहा गया है कि नवंबर 2015 से लेकर सितंबर 2016 तक जवानों को जूता नहीं दिया गया. इस वजह से जवानों को पुराने जूतों को ही रिसाइकल कर काम चलाना पड़ा. कैग ने अपने रिपोर्ट में कहा, "सामानों की खरीद में कमी, पुराने चीजों की सप्लाई या फिर पूरी तरह से सप्लाई बंद होने की वजह से ऊंचे स्थानों पर तैनात जवानों की सेहत और स्वास्थ्य प्रभावित हुए."
पुराना फेस मास्क, पुराना जैकेट
पढ़ें: खातों में क्यों नहीं डाले 15 लाख? पीएम मोदी, गृह मंत्री के खिलाफ दी शिकायत
रक्षा सामानों की खरीद में खामियों के बारे में CAG ने कहा कि पुराना फेस मास्क, पुराने जैकेट और स्लीपिंग बैग को खरीदा गया. इससे जवानों को परेशानी हुई और वे नये प्रोडक्ट का लाभ नहीं उठा सके. रिपोर्ट में कहा गया है कि रक्षा प्रयोगशालाओं द्वारा रिसर्च के अभाव की वजह से देश को इन सामानों के लिए आयात पर निर्भर रहना पड़ा.
9000 फीट ऊंचाई पर राशन की किल्लत
कैग ने 9000 फीट ऊंचे स्थान पर रहने के लिए दिए जाने वाले विशेष राशन और आवास की व्यवस्था पर भी सवाल उठाया है. बता दें कि लेह लद्दाख और सियाचिन में रहने वाले जवानों को कैलरी की कमी पूरा करने के लिए विशेष खाना दिया जाता है. कैग के मुताबिक उन्हें इसके इस्तेमाल में भी कंजूसी करनी पड़ी.
कैग ने टिप्पणी की है कि विशेष खाने के बदले दिया जाने वाले सब्स्टीट्यूट की सप्लाई में कमी की वजह से जवानों को कई बार 82 परसेंट तक कम कैलोरी मिली. लेह की एक घटना का जिक्र करते हुए कैग ने कहा है कि यहां से स्पेशल राशन को सैनिकों के लिए जारी हुआ दिखा दिया गया, लेकिन उन्हें हकीकत में ये सामान मिला ही नहीं था.