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कावेरी प्रबंधन बोर्ड की मांग को लेकर मिट्टी के अंदर गले तक घुसे किसान

कुछ वक्त के लिए हालात तनावग्रस्त हो गए जब करीब 50 किसान नारेबाजी करते हुए वहां पहुंच गए और सीएमबी के तुरंत गठन की मांग करने लगे. उन सभी ने खुद को मिट्टी में समाने की कोशिश की, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उन्हें ऐसा करने से रोक लिया.

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सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

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तमिलनाडु में किसानों के एक समूह ने गुलाब की मालाओं के साथ शुक्रवार को कावेरी नदी के शुष्क तल में खुद को गले तक मिट्टी में समा लिया. उन्होंने अपनी मांगों को रेखांकित करने और कावेरी प्रबंधन बोर्ड (सीएमबी) बनाने की मांग को लेकर विरोध करने के इस अनूठे तरीके का इस्तेमाल किया.

पी अय्यकन्नू की अगुवाई में किसानों ने खुद को मिट्टी में समाने का यह प्रदर्शन करीब दो घंटे तक किया. उन्होंने यह प्रदर्शन श्रीरंगम में यहां कावेरी नदी तट पर किया. बाद में पुलिस ने उन्हें स्वयंसेवियों की मदद से हटाया.

कुछ वक्त के लिए हालात तनावग्रस्त हो गए जब करीब 50 किसान नारेबाजी करते हुए वहां पहुंच गए और सीएमबी के तुरंत गठन की मांग करने लगे. उन सभी ने खुद को मिट्टी में समाने की कोशिश की, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उन्हें ऐसा करने से रोक लिया और उनमें से केवल 17 को प्रदर्शन करने की इजाजत दी.

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किसानों ने फौरन गड्ढा खोदा और खुद को गले तक बालू में समा लिया और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद सीएमबी गठित नहीं करने को लेकर केंद्र के खिलाफ नारेबाजी की. 73 वर्षीय अय्यकन्नू ने कहा, 'हम नौ अप्रैल तक इंतजार करेंगे. हमें यकीन है कि इंसाफ होगा.'

अय्यकन्नू किसानों की समस्याओं के प्रति ध्यान आकर्षित करने के लिए चूहों को खाने जैसे अजीबोगरीब प्रदर्शन के लिए जाने जाते हैं. नौ अप्रैल को ही शीर्ष अदालत सीएमबी के गठन को लेकर तमिलनाडु और केंद्र की याचिका पर सुनवाई करेगी.

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