सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता पर ऐतिहासिक फैसला देते हुए दो बालिगों के बीच सहमति से बनाए गए समलैंगिक संबंध को अपराध के दायरे से बाहर कर दिया. इस अधिकार को पाने के लिए LGBT समुदाय काफी लंबे वक्त से कानून संघर्ष कर रहा था और आखिर में उन्हें जीत मिली है.
कोर्ट के फैसले से पहले समलैंगिकों को सामाजिक तौर पर उत्पीड़ित किया जाता रहा है साथ ही कानून वैधता न होने के चलते प्रशासन और पुलिस भी उनके साथ नहीं खड़ी दिखी. पिछले दिनों में LGBT समुदाय के लोगों को अपराधियों से लेकर पुलिस की ओर से ब्लैकमेल और प्रताड़ित करने की घटनाएं सामने आती रही हैं.
फैसले से क्या बदलेगा?
समलैंगिकों के अधिकारी की लड़ाई लड़ने वाले नाज फाउंडेशन की निष्ठा का मानना है कि फैसले से हमारे अधिकारों को पहचान मिली है. वो कहती हैं कि अब हम सड़कों पर हाथ पकड़कर आजादी से घूम सकते हैं और जो चाहें वो पहन सकते हैं. उनका मनना है कि कोर्ट के फैसले से समुदाय के लोगों को उम्मीद जगी है कि अब जल्द ही उन्हें शादी करने का कानून अधिकार भी हासिल हो जाएगा. इसके अलावा अन्य कपल की तरह समान सेक्स वाले कपल भी बच्चों को गोद, उनकी देखभाल और परिवार कल्याण से जुड़ी नीतियों का लाभ ले सकेंगे.
वरिष्ठ वकीलों और न्यायविदों को लगता है कि इस फैसले के बाद से समलैंगिकों के लिए नए रास्ते खुलेंगे और अब वो पूरे सम्मान के साथ जीवन बिता सकते हैं. वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी का कहना है कि फैसले से समानता को बल मिलेगा.

दिल्ली यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर पंकज अरोड़ा का मानना है कि अब लोगों के बीच समानता को लेकर बेहतर समझ पनपेगी और वह किसी एक जेंडर को लेकर लकीर के फकीर बनकर नहीं रहेंगे. उन्होंने कहा कि कुछ समय बाद लोगों दूसरों की निजी पसंद को समझने लगेंगे और उसमें दखल देना बंद कर देंगे.
आगे हैं कई चुनौतियां
देशभर के कार्यकर्ताओं ने कोर्ट के फैसले का अपने ही अंदाज में जश्न मनाया और अपनी खुशी का इजहार किया है. लेकिन उन्हें इस बात की भी चिंता है कि गे सेक्स के सामने परंपरागत मूल्यों की चुनौतियां हैं और भेदभाग आगे भी जारी रहने की मजबूत आशंका है. मामले में याचिकाकर्ता बालचंद्रन का कहना है कि लोगों की सोच बदलने में वक्त लगेगा. बीजेपी के सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने तो फैसले के तुरंत बाद कह दिया कि इससे HIV के मामलों को बढ़ावा मिलेगा और अगली सरकार इस फैसले को पलट देगी.