भारत की निराशा के बीच संभावना है कि गृह मंत्री पी चिदंबरम अगले माह पाकिस्तान यात्रा के दौरान अपने पाक समकक्ष रहमान मलिक के साथ मुलाकात में लश्करे तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद को पाकिस्तानी उच्चतम न्यायालय द्वारा बरी किये जाने का मुद्दा उठा सकते हैं.
चिदंबरम की 26 जून को दक्षेस के आतंरिक मामलों के मंत्रियों के सम्मेलन से इतर मलिक के साथ द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना है. भारत का मानना है कि सईद बिना सजा के छूट सकता है क्योंकि पाकिस्तान उसके खिलाफ सबूतों को उचित ढंग से नहीं पेश कर रहा.
सूत्रों ने बताया कि बैठक में चिदंबरम द्वारा पाकिस्तान में मुंबई आतंकी हमले की जांच और मुकदमे की स्थिति का मुद्दा उठाये जाने की संभावना है. इस सिलसिले में गृह मंत्री द्वारा सईद के खिलाफ कार्रवाई पर जोर डाले जाने की संभावना है. भारत सईद को मुंबई हमले का मुख्य षड्यंत्रकर्ता मानता है लेकिन पर्याप्त सबूतों के अभाव में पाकिस्तानी उच्चतम न्यायालय ने उसे बरी कर दिया था.
पाकिस्तान जहां दावा कर रहा है कि उसके पास सईद के खिलाफ अधिक सबूत नहीं हैं वहीं भारत इस बात पर अड़ा हुआ है कि उसने पाकिस्तान को पर्याप्त सबूत मुहैया कराये हैं. इनमें मुंबई तथा अन्य कई आतंकी हमलों में सईद की संलिप्तता का पता चलता है. लेकिन पाकिस्तान इसका उपयोग नहीं कर रहा. चिदंबरम द्वारा पाकिस्तान में आतंकी ढांचों को ध्वस्त करने और आतंकवादियों की सीमा पार आवाजाही पर रोक लगाये जाने के बारे में जोर दिये जाने की संभावना है.
हालांकि भारत को इस मुलाकात के नतीजों को लेकर कोई खास उम्मीद नहीं है. एक अधिकारी ने कहा, ‘हाल के कुछ घटनाक्रमों को ध्यान में रखते हुए हमें पाकिस्तान से कोई बड़ी उम्मीद नहीं है कि वह हमारे द्वारा उठाये गये किसी भी मुद्दे पर कोई कार्रवाई करेगा.’
इस्लामाबाद पाक स्थित आतंकी संगठनों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहा तथा उन्हें मुक्त रूप से भारत विरोधी गतिविधियों में संलग्न होने की इजाजत दे रहा है. सूत्रों ने कहा कि यदि पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में कथित मानवाधिकार हनन, सभी राजनीतिक बंदियों को रिहा करने, सशस्त्र बल (विशेष अधिकार कानून) सहित कुछ मुद्दे उठाये तो इससे पड़ोसी देशों के बीच विश्वास बहाली के बजाय भारत की निराशा ही बढ़ेगी.