कांग्रेस की अगुवाई में 7 विपक्षी दलों की ओर से सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को केंद्र में सत्तारुढ़ बीजेपी ने बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. उन्होंने आरोप लगाया कि न्याय का राजनीतिकरण करने की कोशिश जा रही है.
सीजेआई के खिलाफ पेश किए गए महाभियोग पर बीजेपी सांसद और पार्टी की प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी ने कहा कि विपक्ष संविधान की अवहेलना कर रहा है. आज का दिन बहुत ही दुर्भाग्य का दिन है. न्याय का राजनीतिकरण करने की कोशिश जा रही है.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी का शीर्ष नेतृत्व और कुछ विपक्षी पार्टियां, जिनकी राजनीतिक जमीन खत्म हो चुकी है वे इस तरह की हरकत कर रहे हैं.न्यायपालिका की गरिमा के खिलाफ काम कर रहे हैं. इससे लोकतांत्रिक संस्थानों को नुकसान हो रहा है.
महाभियोग पर बोलते हुए बीजेपी मुख्यालय में लेखी ने कहा कि विपक्ष न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है. वह चाहता है कि उनके हिसाब से फैसला लिया जाए, वरना महाभियोग प्रस्ताव लाया जाएगा.
लेखी ने कहा कि अंबेडकर ने जिस संविधान की आधारशिला रखी थी उसे खराब करने की कोशिश की जा रही है. संविधान की अवहेलना कर रहे हैं. आज का दिन बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. न्यायपालिका और राजनीति को अलग-अलग रखा जाता है, लेकिन ये लोग न्यायपालिका का राजनीतिकरण कर रहे हैं.
कांग्रेस पर हमला बोलते हुए लेखी ने कहा कि वह जब सत्ता में थी तो उसने न सिर्फ बीजेपी नेताओं को परेशान किया, बल्कि झूठे केसों में फंसाकर प्रताड़ित किया. अब वही सब कुछ सामने आ रहा है, अब उससे विचलित होकर उन लोगों ने कभी देशभक्त के नाम पर या अन्य कई तरह से लोगों को प्रताड़ित किया. हर तरह की प्रताड़ना इन लोगों को दी गई. ऐसे में जब कोर्ट ने सबूतों के आधार पर पाया कि इन पर सबूत नहीं है और इन सब मामलों में उन्हें बरी किया गया.
इससे पहले कांग्रेस की अगुवाई में 7 विपक्षी दलों ने शुक्रवार को राज्यसभा सभापति और उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू से मुलाकात कर मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव सौंपा.
कोर्ट ने मीडिया रिपोर्टिंग पर जताई चिंता
महाभियोग लाए जाने को लेकर कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि हम लोग यह प्रस्ताव एक हफ्ते पहले ही पेश करना चाहते थे, लेकिन उपराष्ट्रपति के पास समय नहीं था. आज हमने 7 राजनीतिक दलों के साथ मिलकर राज्यसभा चेयरमैन को महाभियोग का प्रस्ताव सौंप दिया. उन्होंने बताया कि 71 सांसदों के हस्ताक्षरों के साथ यह प्रस्ताव सौंपा गया है. इनमें 7 सांसद रिटायर हो चुके हैं. फिर भी यह जरूरी संख्या से अधिक है. आजाद ने बताया कि महाभियोग का प्रस्ताव 5 बिंदुओं के आधार पर पेश किया गया है.
सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया रिपोर्टिंग पर बैन से किया इनकार
दूसरी ओर, देश की शीर्ष अदालत ने महाभियोग प्रक्रिया पर मीडिया में रिपोर्टिंग पर चिंता जताई है. कोर्ट ने कहा है कि हम सभी मीडिया में ऐसी खबरें देखकर परेशान हैं और यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. यह चिंता की बात है कि राजनेता किस तरह न्यायपालिका के खिलाफ मीडिया में बयानबाजी कर रहे हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल का सहयोग मांगा है. इस मामले पर अब 7 मई को सुनवाई होगी. हालांकि कोर्ट ने इस तरह के मसले पर रिपोर्टिंग पर बैन करने से इनकार किया है.