पूर्वोत्तर राज्य असम में गुरुवार को हुए सीरियल धमाकों के सिलसिले में मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने आपातकालीन बैठक बुलाई है. खुफिया विभाग ने जानकारी दी है कि असम में विस्फोटक पड़ोसी देश से लाए गए थे. वहीं एनएसजी और फॉरेंसिक की टीमें इस विस्फोट की जांच पड़ताल करने के लिए असम जाएंगी.
वहीं इन विस्फोटों के तुरंत बाद गुवाहाटी में उग्र भीड़ द्वारा पुलिस वाहनों और बसों पर किए गए हमलों को देखते हुए क्षेत्र में कर्फ्यू लगा दिया गया. उग्र भीड़ ने दर्जन भर वाहनों को आग के हवाले कर दिया. भीड़ पर काबू पाने के लिए पुलिस ने हवा में गोलियां चलाईं. पुलिस के अनुसार इस कार्रवाई में कोई भी घायल नहीं हुआ.
उधर केद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटील ने इन धमाकों की निंदा की है. केंद्रीय गृह राज्य मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने शुरू में आठ धमाके होने की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि असम एक अस्थिर राज्य है. पिछले 20-25 सालों से वहां ऐसे हालात पैदा होते रहे हैं. हालांकि केंद्र ने राज्य सरकार को निर्देश जारी किया है. उधर केंद्रीय राज्य मंत्री शकील अहमद ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कुल 10 धमाकों की पुष्टि की. मरने वालों के विषय पर पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि अभी कोई पुख्ता सूचना नहीं मिली है. साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार इस बाबत मीडिया को लगातार सूचना देती रहेगी.
असम गणपरिषद के प्रवक्ता अपूर्व भट्टाचार्य ने इन धमाकों के लिए तरुण गोगोई सरकार को दोषी ठहराया है. असम की ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित लेखिका और समाजसेविका इंदिरा गोस्वामी ने भी इन धमाकों की निंदा करते हुए कहा कि उन्हें गहरा सदमा लगा है. उधर असम के स्वास्थ्य मंत्री हेमंत शर्मा के मुताबिक यह सभी ब्लास्ट हाई इंटेंसिटी वाले थे.
गुवाहाटी से सांसद कृपचल्या ने इन धमाकों को पूर्वोत्तर में अब तक का सबसे बड़ा हमला बताया है और इन्हें रोक पाने में असमर्थ होने के लिए असम की गोगोई सरकार को दोषी ठहराया है. साथ ही उन्होंने अपील की है कि ऐसे वक्त में लोग संयम से काम लें और घायलों की मदद के लिए आगे आएं.