चीन न सिर्फ भारत के इलेक्ट्रॉनिक बाजार, कंज्यूमर मार्केट में घुसपैठ कर रहा है, बल्कि उसका दखल हमारे खाने पीने की आदतों में भी हो रहा है. उत्तर भारत का लोकप्रिय अनाज राजमा मार्केट में भी चीन ने घुसपैठ कर ली है. भारत में चीनी राजमा जम्मू-कश्मीर की उपज के नाम से बिक रहा है.
चीन से आयात किया जाने वाले राजमा भारत के बाजारों में अच्छी पकड़ रखता है. लोकल बाजारों और गली मोहल्ले की किराना की दुकानों तक में यह राजमा बिकता है. लोगों को इतनी भी जानकारी नहीं है कि जो राजमा वह खा रहे हैं वह भारत का है या फिर चीन में पैदा हुआ है.
20 हजार मीट्रिक टन आयात
दिल्ली एनसीआर में हर साल 20 हजार मीट्रिक टन राजमा चीन से आयात किया जाता है. यह यहां के पूरे राजमा मार्केट का 50 फीसदी से ज्यादा हिस्सा है.
भारत में दालों के आयात-निर्यात और मार्केट पर नजर रखने वाली संस्था जेएलवी एग्रो के विवेक कहते हैं जब तक सरकार इंपोर्ट पर अतिरिक्त टैक्स और प्रतिबंध नहीं लगाएगी तब तक चीनी राजमा का बहिष्कार करना मुश्किल है क्योंकि भारत के बाजार में कौन सा राजमा चीन का है और कौन सा भारत का है इसमें फर्क करना बहुत मुश्किल है.
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भारत के राजमा की मार्केटिंग नहीं
दिल्ली के नया बाजार में दालों की होलसेल ट्रेडिंग का काम करने वाले मनीष सिंघल कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि भारत में जो राजमा पैदा होता है वह पर्याप्त नहीं है, बल्कि सच्चाई यह है कि भारत का राजमा बिक्री ना होने की वजह से खराब हो जाता है. वहीं चीनी राजमा का मार्केट भारत में संतुलित तरीके से फैला हुआ है. भारत में साल भर देश के हर हिस्से में चीन का राजमा उपलब्ध होता है, जबकि भारतीय राजमा की भारत में ही पकड़ नहीं है.
एक जैसा होता है स्वाद
चीन और भारत में पैदा हुए राजमा का स्वाद लगभग एक जैसा ही है, हालांकि दोनों का रंग थोड़ा अलग है. चीन का राजमा हल्के भूरे रंग का होता है जबकि भारतीय राजमा थोड़े गाढ़े रंग का है.
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नॉर्थ इंडिया की सबसे बड़ी दाल मंडी नया बाजार के कुछ बड़े व्यापारी अभी चीनी राजमा के बॉयकॉट पर एकमत नहीं हैं. अधिकतर का कहना है कि हमने एडवांस में ऑर्डर दे रखे हैं ऐसे में अब राजमा का बॉयकॉट करना खुद का नुकसान करना होगा. बता दें कि गलवान में चीनी सैनिकों द्वारा भारतीय सैनिकों के साथ किए गए धोखे के बाद देश में बड़े पैमाने पर चीनी उत्पादों का बहिष्कार हो रहा है.