चीन ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के गिलगित इलाके में अपने 11 हजार सैनिकों की मौजूदगी सम्बन्धी खबरों को गलत बताते हुए कहा है कि बीजिंग के भारत तथा पाकिस्तान से रिश्ते खराब करने के ‘गुप्त उद्देश्यों’ से ऐसी ‘बेबुनियाद’ खबरें फैलाई जा रही हैं.
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ द्वारा जारी किये गए विदेश मंत्री के प्रवक्ता जियांग यू के बयान में कहा गया,‘हमारा मानना है कि मनगढ़त खबरों के जरिये चीन-पाकिस्तान और चीन-भारत के सम्बन्धों को नुकसान पहुंचाने की कुछ लोगों की कोशिशें नाकाम होंगी.’
गौरतलब है कि ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ अखबार ने गत 28 अगस्त को प्रकाशित खबर में कहा था कि चीन ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के गिलगित-बाल्टिस्तान इलाके में करीब 11 हजार सैनिकों की तैनात की है.
बहरहाल, यू का बयान विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर नहीं डाला गया है. चीन ने हाल के महीनों में जम्मू-कश्मीर को विवादित जगह बताकर वहां के निवासियों को बीजिंग का स्टेपल किया हुआ वीजा जारी कर भारत की नाराजगी मोल ली थी.
अब वह भारतीय सेना के उत्तरी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल बी. एस जसवाल को एक सैन्य प्रतिनिधिमंडल में शामिल होने के लिये वीजा देने से इनकार करने को लेकर एक बार फिर विवादों में है.
जनरल को वीजा नहीं देने से खफा भारत ने वह मामला सुलझने तक चीन से अपने सभी सैन्य आदान-प्रदान पर रोक लगा दी है.{mospagebreak}
पाकिस्तानी राजदूत मसूद खान ने कहा,‘वह कहानी गलत और पूरी तरह मनगढ़ंत है.’ खान ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ की उस रिपोर्ट का जिक्र कर रहे थे जिसमें गिलगित-बाल्टिस्तान इलाके में तकरीबन 11 हजार चीनी सैनिक तैनात होने की बात कही गई थी.
उन्होंने कहा कि इलाके में एक भी चीनी सैनिक मौजूद नहीं है. अलबत्ता उस क्षेत्र में बाढ़ राहत कार्य के लिये इस वक्त चीन की ‘मानवीय सहायता टीम’ के सदस्य जरूर मौजूद हैं.
‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने गिलगित-बाल्टिस्तान में कम्युनिस्ट देश की सेना की मौजूदगी को पाकिस्तान के जरिये खाड़ी में सड़क तथा रेल सम्पर्क स्थापित कर रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस इलाके में पकड़ बनाने की योजना का हिस्सा बताया था.