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व्यंग्यः रेल बजट से ये भी उम्मीदे हैं

रेलमंत्री होना भी बड़े नसीब की बात है, कोई पुरुष लगातार घंटों बोलता रहता है और किसी महिला को शिकायत नहीं होती, भारत में ऐसा मौका कम ही पुरुषों को मिलता है. रेल बजट आने को है, बजट का इकलौता दिन होता है जब सांसद चाहकर भी बहिर्गमन नहीं करते, गर्भगृह में कागज नही फेंक पाते, प्रधानमंत्री का इस्तीफा नहीं मांग पाते.

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रेल बजट
रेल बजट

रेलमंत्री होना भी बड़े नसीब की बात है, कोई पुरुष लगातार घंटों बोलता रहता है और किसी महिला को शिकायत नहीं होती, भारत में ऐसा मौका कम ही पुरुषों को मिलता है. रेल बजट आने को है, बजट का इकलौता दिन होता है जब सांसद चाहकर भी बहिर्गमन नहीं करते, गर्भगृह में कागज नही फेंक पाते, प्रधानमंत्री का इस्तीफा नहीं मांग पाते.

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आम बजट और रेल बजट संसद के प्रति हमारी आस्था को मजबूत करते हैं, इसीलिए तो बजट के दिन हर कोई टीवी-रेडियो पर बजट सुनने में लगा होता है, बाकी दिनों में उन्हें भी पता होता है कि अंदर क्या होना है. बजट में आम आदमी का ध्यान सिर्फ इस बात पर होता है कि सस्ता क्या-क्या होने वाला है, बजट से हमारी उम्मीदें होती है. नहाने का लाल साबुन सस्ता हो जाए या खाने की पीली दाल सस्ती हो जाए, जबकि जमुहाई लेते विपक्षी तो बस इस ताक में रहते हैं कि कब छुट्टी मिले और बाहर जाकर 'बजट को निराशाजनक' बता सकें. कभी गहराई से पूछा जाए तो पता लगेगा बजट का वो हिस्सा निराशाजनक था जब मेज की थपथपाहट से उनकी नींद टूट गई.

गुरुवार को फिर रेल बजट आएगा, कुछ नई ट्रेनों, कुछ बदले रूट, घटे-बढ़े किराए और घोषणाओं के साथ आकर चला भी जाएगा पर ट्रेन के मुसाफिरों की असल मुसीबतें वहीं रह जाएंगी. आम आदमी की उम्मीदों पर जो रेल बजट खरा उतरे उसे कुछ ऐसा होना चाहिए जिसमें नई सुविधाएं भले कम हों पर कुछ सुधार जरूर हो जाए.

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1. प्लेटफॉर्म पर खड़ी ट्रेन में शौचालय का प्रयोग न करें. ये चेतावनी हर ट्रेन के टॉयलेट में लिखी होती है पर चलती ट्रेन में इसी सुविधा का प्रयोग करने के लिए बचपन से नट की हिलती रस्सी पर चलने का कौशल चाहिए होता है, रेलमंत्री इस तरफ ध्यान जरूर दें.

2. रेलवे को यात्री किराए से कमाई होती है, माल ढुलाई से कमाई होती है पर उनसे कहीं ज्यादा कमाई सात-सात साल से एक ही ट्रेन में अल्सर के ऑपरेशन के नाम पर चंदा मांगने वालों और ताली बजाकर भयभीत करने वालों की होती है. रेलवे अगर उनकी कमाई का भी कुछ हिस्सा निकलवा सके तो यात्री किराए में बढ़ोतरी न करनी पड़े.

3. जनरल डिब्बों में सीट पर रुमाल रख सीट कब्जे में करना गलत नहीं लगता, ना ही टॉयलेट से चेन में बंधे मग्गे गुम हो जाना, पर वाशबेसिन पर थूकना और पंखे पर जूते रखना सबसे गलत बात है. इसे दंडनीय अपराध घोषित करने की जरूरत है.

4. प्रधानमंत्री बुलेट ट्रेन की बात करते हैं, पर हाथ आती है पटरी की 'बू' और 'लेट' ट्रेन, इस सबकी हमें आदत पड़ चुकी है बस हर लेट आने वाली ट्रेन पर टिकट देते समय ही कितनी देर होने वाली है छपा हो, तो घर से निकलने की जल्दी तो न रहेगी.

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5. इसके अलावा रेलमंत्री चाहें तो एकाध सुविधाएं और दे दें जैसे हर सीट के पास चार्जिंग पॉइंट हो, लोअर बर्थ बदलने वालों से राहत मिल जाए और सबसे खास सीटें थोड़ी चौड़ी हो जाएं, ताकि करवट लेते बन सके.

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