कांग्रेस के पुराने सदस्य पार्टी की कार्य प्रणाली से बेहद असंतुष्ट हैं और राहुल के बाद अब सोनिया गांधी की आलोचना कर रहे हैं. कांग्रेस के एक मुस्लिम सांसद ने पार्टी की कार्य प्रणाली के लिए सोनिया गांधी की सख्त आलोचना की है. उन्होंने पूछा कि सोनिया ने लोकसभा चुनाव के दौरान जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी से मिलकर समर्थन क्यों मांगा था.
'इकोनॉमिक टाइम्स' में छपी खबर के मुताबिक दो बार लोक सभा के सांसद रहे मौलाना असरारुल हक ने कहा कि सोनिया को बुखारी से नहीं मिलना चाहिए था. मौलाना ने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान सभी से अपील की जानी चाहिए थी लेकिन किसी समुदाय विशेष से ही अपील करना उचित नहीं था. जिसने भी ऐसा किया, गलत किया.
मौलाना ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य भी हैं. अखबार ने मौलाना से सोनिया और बुखारी की बैठक के बारे में सवाल पूछा था. ध्यान रहे कि सोनिया गांधी बीते अप्रैल में अहमद बुखारी से मिलीं और उन्होंने मुस्लिम नेताओं अपील की थी कि वे देखें कि सेक्युलर वोट बंटने ना पाएं. उनकी इस बात से काफी हो-हल्ला मचा था और काफी आलोचना भी हुई थी.
मौलाना ने कहा कि अब परिस्थितियां बदल गई हैं. अगर मोदी काम करेंगे तो जीतेंगे और अगर काम नहीं करेंगे तो हार जाएंगे. नौजवानों ने नरेन्द्र मोदी को बडी़ तादाद में वोट दिया क्योंकि उन्होंने विकास का वादा किया था.
उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी मोदी के साथ सहयोग करने को तैयार है बशर्ते वह विकास को तेज करें लेकिन वे किसी भी हालत में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने नहीं देंगे. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अनुच्छेद 370 हटाने या समान आचार संहिला लागू करने की कोशिश की गई तो यह देश बंट जाएगा. हम मौलिक अधिकारों को बदलने नहीं देंगे. नरेन्द्र मोदी को व्यवस्था के तहत ही चलना होगा.