अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने H1-B वीजा को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया था, अब वहां पर राष्ट्रपति पद के डेमोक्रेट उम्मीदवार जो बिडेन ने वादा दिया है कि चुनाव जीतने पर यह प्रतिबंध हटा लेंगे. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी अमेरिका से कहा कि वह H1-B वीजा पर लगे प्रतिबंध को हटाए.
कोरोना संकट के बीच अमेरिका ने पिछले महीने H1-B वीजा इस साल के अंत तक निलंबित कर दिया जिसका असर बड़ी संख्या में भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स पर पड़ेगा. इस बीच अमेरिका में राष्ट्रपति पद के डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बिडेन ने वादा दिया है कि चुनाव जीतने के बाद वह इस प्रतिबंध को खत्म कर देंगे.
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पूर्व उपराष्ट्रपति जो बिडेन के वादे को लेकर ट्वीट करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि अमेरिका ने अपने H1-B कार्यक्रम के माध्यम से भारत के विशाल प्रतिभा पूल को गले लगाकर बहुत लाभ उठाया है. अब इसका निलंबन लाखों भारतीयों और अमेरिकी कंपनियों को प्रभावित करेगा. इसे निरस्त किया जाना चाहिए.

पिछले महीने ट्रंप प्रशासन की ओर से H1-B पर अस्थायी प्रतिबंध लगाए जाने के फैसले से भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स को काफी नुकसान का अनुमान है क्योंकि यहां से बड़ी संख्या में नौकरी करने युवा भारतीय अमेरिका जाते हैं. हालांकि दावा किया जा रहा है कि अमेरिका के नए वीजा नियमों का भारतीयों पर सीमित असर होगा.
ये निलंबन साल के आखिर तक वैध रहेगा. डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों के मुताबिक, यह फैसला अमेरिकी श्रमिकों के हित के लिए लिया गया है.
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अमेरिका हर साल 85 हजार H1-B वीजा देता है. इनमें से करीब 60 हजा़र भारतीयों को मिलते हैं. चूंकि 6 महीने के लिए रोक लगी है. ऐसे में केवल 30 हजा़र भारतीयों को ही वीजा नहीं मिलेगा.
क्या है एच-1 बी वीजा
एच-1 बी वीजा अमेरिका की एक गैर-प्रवासी वीजा है. अमेरिका में कार्यरत कंपनियों को यह वीजा ऐसे कुशल कर्मचारियों को रखने के लिए दिया जाता है जिनकी अमेरिका में कमी हो. इसकी वैलिडिटी 6 साल की होती है. अमेरिकी कंपनियों की डिमांड की वजह से भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स इस वीजा को सबसे अधिक हासिल करते हैं.