रेलवे ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कोरोना के खिलाफ जारी अपने अभियान की जानकारी दी. रेलवे बोर्ड के चेयरमैन बीके यादव ने बताया कि 5231 रेलवे कोच को आइसोलेशन बेड्स में तब्दील किया गया है. स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से 6 मई को जो निर्देश जारी किए गए थे, उसके आधार पर रेलवे आइसोलेशन सेंटर बनाने का काम कर रहा है.
रेलवे कोच में बने आइसोलेशन सेंटर में कोरोना के हल्के लक्षण वाले मरीज रखे जाएंगे. कोरोना के संदिग्ध या पुष्ट मरीजों के लिए अलग से कोच बनाए जाएंगे. ऐसे हर कोच में 8 केबिन होंगे. रेलवे ने इसके लिए नोडल अफसर बनाए हैं जो अलग-अलग राज्यों में कोविड केयर बेड्स की जानकारी देंगे. 130 स्टेशन ऐसे हैं जहां रेलवे की कोई मेडिकल टीम नहीं है, इसलिए राज्यों से कहा गया है कि वे पैरामेडिकल और मेडिकल टीम मुहैया कराएं.
कोरोना पर फुल कवरेज के लिए यहां क्लिक करें
रेलवे के आइसोलेशन बेड का प्रबंधन राज्य के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी करेंगे. जिस इलाके में आइसोलेशन सेंटर बनाए जाएंगे, वे उस इलाके के अस्पताल से संबद्ध होंगे. इसके लिए एक एंबुलेंस भी रखी जाएगी जो मरीज को रेलवे के आइसोलेशन सेंटर से उस अस्पताल तक पहुंचा सके. दिल्ली की शकूर बस्ती में 50 कोच बनाए गए हैं. जरूरत के मुताबिक ये सभी कोच तैयार हैं. बढ़ते तापमान को देखते हुए सेंटर की छत को इंसुलेट करने की भी तैयारी है. रेलवे ने बताया कि महज 24 घंटे के अंदर कुछ वेंटिलेटर्स नागपुर से मुंबई पुहंचाए गए हैं. ऐसा इसलिए हो पाया क्योंकि भारतीय रेलवे का भारतीय डाक के साथ करार है.
क्या कहा रेलवे बोर्ड ने
भारतीय रेलवे ने सोमवार को कहा कि श्रमिक स्पेशल ट्रेनों पर प्रति व्यक्ति औसत किराया 600 रुपये था और 1 मई से 60 लाख प्रवासी कामगारों को घर ले जाने से रेलवे ने लगभग 360 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त किया है. बोर्ड के चेयरमैन ने कहा कि अब तक 4450 श्रमिक ट्रेनें चलाई गई हैं.
रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने कहा, श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का औसत किराया 600 रुपये प्रति यात्री है. हमें ध्यान रखना है कि ये मेल, एक्सप्रेस ट्रेनों के सामान्य किराए हैं और विशेष ट्रेनों के किराए नहीं हैं, जो कि अधिक हैं. हमने 60 लाख यात्रियों को पहुंचाया है, इसलिए राजस्व का भी हिसाब लगाना चाहिए. हालांकि, हम संचालन की लागत का केवल 15 प्रतिशत प्राप्त करने में कामयाब रहे. लागत का 85 प्रतिशत केंद्र की ओर से वहन किया जा रहा है.
अब काम पर लौट रहे कुछ श्रमिक
रेलवे ने कहा कि कुछ श्रमिक अपने घरों से शहरों की ओर लौट रहे हैं. रेलवे ने कहा, हमने पहले से 230 ट्रेनें चलाई हैं ताकि प्रवासी अपने काम पर लौट सकें. प्रवासियों का शहर की तरफ लौटना जारी भी हो गया है. हालांकि ट्रेनों में कई सीटें खाली जा रही हैं. कोरोना की तैयारियों के बारे में रेलवे ने बताया कि रेलवे के 50 अस्पतालों में कोविड मरीजों के लिए 5 हजार बेड बनाए गए हैं. रेलवे के 17 हॉस्पिटल कोविड स्पेशल हॉस्पिटल में तब्दील किए गए हैं. इनमें 33 ब्लॉक कोविड मरीजों के लिए अलग से बनाए गए हैं.
कोरोना कमांडोज़ का हौसला बढ़ाएं और उन्हें शुक्रिया कहें...
इसी के साथ रेलवे ने यह भी बताया कि काफी कम ट्रेनें ऐसी हैं जिनमें जून और जुलाई की वेटिंग है. इन दोनों महीनों में ज्यादातर ट्रेन में सीटें खाली हैं. केवल 3 ट्रेन हैं जो पूरी तरह से भरी हैं. एक डिब्रूगढ़ की और दो अमृतसर की ट्रेन हैं.
4450 श्रमिक ट्रेन चलाई गई
रेलवे ने यह भी बताया कि अब तक 4450 श्रमिक ट्रेन चलाई गई हैं. 26 मई से औसतन 250 ट्रेन और चलाई जा रही हैं. 3 जून को राज्य सरकारों से पूछा गया है कि ट्रेन की जरूरत हो तो बताया जाए. 3 जून तक राज्यों की ओर से 171 ट्रेन की मांग की गई है. 4 से 14 जून तक 222 ट्रेन चलाई गई हैं. 14 जून को राज्यों से दोबारा पूछा गया कि अगर प्रवासी श्रमिकों को घर पहुंचाने के लिए ट्रेन की जरूरत हो तो रेलवे को बताना चाहिए. महाराष्ट्र खासकर मुंबई में ट्रेन के संचालन के लिए खास नियम हैं. महाराष्ट्र सरकार ने जरूरी सेवाओं के लिए सेंट्रल और वेस्टर्न रेलवे जोन से ट्रेन की मांग की है. इन ट्रेनों में यात्रा के लिए राज्य सरकार ई-पास जारी करेगी. नॉर्मल सीटिंग कैपेसिटी 1200 लोगों की है.