गाय देश में लगातार सुर्खियों में है. कहीं कथित गो रक्षकों का चोला पहन कर असमाजिक तत्व कानून अपने हाथ में लेते हैं. तो कहीं गो तस्करों की पुलिस से मुठभेड़ सुर्खियां बनती हैं. इस बीच, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हंसराज अहीर ने सुझाव दिया है कि 'प्रोजेक्ट टाइगर' की तरह ही देश में 'प्रोजेक्ट काऊ' शुरू किया जाना चाहिए. टाइगर रिजर्व की तरह ही देश में काऊ रिजर्व होने चाहिए.
अहीर के मुताबिक जिन राज्यों में गो वध पर पाबंदी लागू है, वहां गायों के अभयारण्य (सेंक्चुरी) बनाई जानी चाहिए. अहीर का कहना है कि उन्होंने ये सुझाव दिया है और उम्मीद है कि सरकार इस पर विचार करेगी. आज तक/इंडिया टुडे ने इस मुद्दे पर गृह राज्य मंत्री के साथ विस्तार से बातचीत की.
अहीर ने कहा, 'काऊ रिजर्व या सेंक्चुरी के संबंध में मैंने सुझाव दिया है. महाराष्ट्र में गो वध पर पाबंदी लगी है. कानून बना है. गरीब किसानों को बूढ़ी गाय या दूध ना देने वाली गायों को पालने में दिक्कत होती है. मेरे सुझाव से इसका समाधान है कि देश में बहुत बड़ा वन क्षेत्र है. जहां घास उगता है और व्यर्थ जाता है. इस घास को काटकर बैंक के तौर पर बनाया जा सकता है. वन क्षेत्र खाली पड़ा है. हजारों एकड़ जमीन पर सेंक्चुरी बना सकते हैं. जिस तरह टाइगर प्रोजेक्ट हैं, टाइगर सेंक्चुरी हैं, उसी तरह काऊ सेंक्चुरी भी बनाई जा सकती हैं.'
अहीर ने साफ किया कि अभी उन्होंने सुझाव ही दिया है, सरकार की तरफ से विचार नहीं हुआ है. अहीर के मुताबिक जब वो विपक्ष में थे तब भी यही बात कहते थे. अहीर ने कहा कि गाय के नाम पर जिस तरह की निंदनीय घटनाएं हुई हैं, वो नहीं होनी चाहिए थीं. गाय के नाम पर हुई हिंसक घटनाओं की प्रधानमंत्री ने भी निंदा की और गृह मंत्री ने भी. अहीर ने जोर देकर कहा कि उनका सुझाव अमल में आता है तो इस तरह की घटनाएं भी रुक जाएंगी.
राज्यों में गाय अभयारण्य बनाने पर जो खर्च होगा, वो कहां से आएगा तो इस पर अहीर का जवाब था- 'खर्च आने की बात ही कहां है. देश में बड़ा वन क्षेत्र है , घास अपने आप उगता है. ऐसी धारणा रही है कि वन सिर्फ वन्य प्राणियों के लिए ही होते हैं. मेरा मानना है कि जितने भी प्राकृतिक साधन है उन पर हर प्राणी का अधिकार है. बरसों से वनों में गाय, भैंस, बकरी चरती आई हैं. लेकिन उन्हें ऐसा करने से रोकने के लिए मांग भी अब उठती रहती हैं.'
अहीर ने कहा कि टाइगर प्रोजेक्ट बन सकता है तो गाय के लिए भी बन सकता है. अहीर ने दावा किया कि उन्होंने अपने सुझाव पर प्रकाश जावड़ेकर, जिनके पास पहले पर्यावरण विभाग था, से भी बात की थी. इसके अलावा पर्यावरण राज्य मंत्री अनिल दवे से भी बात की. दोनों का रुख सकारात्मक दिखा.
कुछ वर्गों की ओर से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग के बारे में अहीर से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सरकार से हर तरह की मांग नागरिक कर सकते हैं. ये भावनाओं की बात है. देश में अनादि काल से गाय को पवित्र मान कर पूजा होती रही है. मांग पर विचार करना सरकार का काम है.
बीते अगस्त में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से कथित गो रक्षकों पर दिए गए बयान की ओर भी अहीर का ध्यान दिलाया गया. इस बयान में प्रधानमंत्री ने कहा था कि गो रक्षकों का चोला पहन 70 से 80 फीसदी लोग असमाजिक गतिविधियों में लगे होते है. प्रधानमंत्री ने सभी राज्यों को गो रक्षकों का डोजियर बनाने की भी सलाह दी थी.
इस पर अहीर ने कहा कि जो भी कानून में हाथ लेगा, उस पर कार्रवाई होगी ही. अहीर ने कहा कि गुजरात में गाय से जुड़ी घटना पर प्रधानमंत्री ने कड़े शब्दों में निंदा की थी. राजस्थान में हाल मे हुई घटना का भी सरकार की ओर से शीर्ष स्तर पर निंदा की गई.
अहीर ने कहा कि चारा बहुत महंगा है, गरीब किसान अनुत्पादक गायों को पाल नहीं पाता. इसीलिए गायों के लिए सेंक्चुरी का सुझाव बहुत सार्थक हो सकता है. आजतक/इंडिया टुडे के स्टिंग ऑपरेशन में कथित गो रक्षकों का काला चिट्ठा खुलने पर अहीर ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसका संज्ञान लिया है और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भरोसा दिया है.