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सुप्रीम कोर्ट पहुंचा गोरक्षा के नाम पर हिंसा का मसला, केंद्र और 6 राज्य सरकारों को नोटिस

शुक्रवार को अदालत में इस मामले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई हुई. सुनवाई के बाद कोर्ट ने मोदी सरकार के साथ राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और झारखंड सरकार से जवाब तलब किया.

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सुप्रीम कोर्ट
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गोरक्षा के नाम पर बढ़ रही हिंसक वारदातों का मसला अब देश की सर्वोच्च अदालत पहुंच गया है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार के अलावा छह राज्यों की सरकारों को नोटिस भेजा है.

सुनवाई में क्या हुआ?
शुक्रवार को अदालत में इस मामले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई हुई. सुनवाई के बाद कोर्ट ने मोदी सरकार के साथ राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और झारखंड सरकार से जवाब तलब किया. जवाब दाखिल करने के लिए इन सरकारों को तीन हफ्तों का वक्त दिया गया है. मामले की अगली सुनवाई 3 मई को होगी.

याचिका में क्या है?
ये याचिका कांग्रेस नेता शहजाद पूनावाला और तहसीन पूनावाला ने दायर की है. याचिका में दावा किया गया है कि गोरक्षा का दावा करने वाले ज्यादातर समूह आपराधिक गतिविधियों में शामिल हैं. खुद प्रधानमंत्री भी ये बात मान चुके हैं. लेकिन फिर भी उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है. याचिका में मांग की गई है कि केंद्र और राज्य सरकारें दलितों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा पर उतारू इन संगठनों पर पाबंदी लगाएं. साथ ही अदालत ने अनुरोध किया गया है कि सोशल मीडिया पर इन संगठनों की ओर से पोस्ट किए जा रहे कंटेंट पर पाबंदी लगाई जाए. याचिकाकर्ता चाहते हैं कि अदालत गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक में गौ-हत्या के खिलाफ लागू कानूनों के कुछ प्रावधानों को असंवैधानिक करार दे.

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याचिका में हिंसक घटनाओं का जिक्र
अपनी दलीलों के समर्थन में याचिका में पिछले 2 सालों में गोरक्षा के नाम पर हुई करीब 10 हिंसक वारदातों का हवाला दिया गया है. इनमें पिछले हफ्ते अलवर में हुए कत्ल के अलावा साल 2015 के दादरी कांड और गुजरात के उना में दलितों पर हुए हमले का भी जिक्र है.

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