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मोदी कैसे लाएंगे अच्छे दिन? मुकेश अंबानी बोले, 'इराक गृहयुद्ध के कारण बढ़ेगी महंगाई'

इराक गृहयुद्ध की आग में जल रहा है. इस आग की आंच में दुनिया के कई देश झुलसने वाले हैं. जिससे भारत भी नहीं बचने वाला. इराक के बिगड़े हालात से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है. इस उछाल के चलते पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में भी इजाफा तय है. ऐसे में महंगाई और बढ़ेगी. उद्योगपति मुकेश अंबानी इस बात की तस्दीक भी कर चुके हैं.

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रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी

इराक गृहयुद्ध की आग में जल रहा है. इस आग की आंच में दुनिया के कई देश झुलसने वाले हैं. जिससे भारत भी नहीं बचने वाला. इराक के बिगड़े हालात से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है. इस उछाल के चलते पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में भी इजाफा तय है. ऐसे में महंगाई और बढ़ेगी. उद्योगपति मुकेश अंबानी इस बात की तस्दीक भी कर चुके हैं.

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खराब मानसून के खतरे के बीच महंगाई को काबू में करना मोदी सरकार की पहली बड़ी चुनौती है. अब इराक में छिड़े गृहयुद्ध से भारतीय अर्थव्यवस्था डावांडोल होने की आशंका बन गई है. इराक से तेल की सप्लाई अगर रोक दी जाती है तो भारत के सामने बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा. भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है.

तेल आयात करने वाले भारत के सामने कच्चे तेल के बढ़े दाम भी संकट बनकर खड़े हो गए है. पिछले एक हफ्ते में कच्चे तेल की दामों में 5 डॉलर प्रति बैरल उछाल आया है. अब इराक का ये गृहयुद्ध तेल की कीमतों में और आग लगाने का काम कर रहा है. आतंकी इराकी तेल के कुओं पर कब्जा जमा रहे हैं. ऐसे में तेल के कुओं के आस-पास सेना और आतंकियों के युद्ध का मोर्चा बन गया है. अगर अमेरिका भी इस युद्ध में बम बरसाने पर उतर आता है तो तेल रिफाइनरियों और तेल के कुओं को खासा नुकसान होगा. इराक की तबाही दुनिय़ा भर की अर्थव्यवस्था को अपनी चपेट में लेगी. तेल की कम सप्लाई और तेल की बेतहाशा बढती कीमतें दोनों मिल कर भारत की अर्थव्यस्था पर दोहरा वार करेंगी.

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तेल की कीमतों के बढ़ने का असर दूसरे उत्पादों पर भी साफ बढ़ेगा. कच्चे तेल की कीमत बढ़ेगी तो देश में माल ढुलाई का खर्च बढ़ेगा, और फिर जरूरी चीजों के दाम बढ़ेंगे. इस संकट से निपटने के लिए मोदी सरकार कुछ नहीं कर सकती है. उसे बस घरेलू मोर्चे पर ही इस संकट से निपटने की जुगत लगानी होगी. लेकिन तेल के मोर्चे पर घरेलू स्तर पर भी कुछ नहीं किया जा सकता है. सरकार फिलहाल अच्छे दिनों की उम्मीद ही कर रही है.

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