ओडिशा में बीते दिनों जब आदिवासी दाना मांझी को अपनी पत्नी के पार्थिव शरीर को कंधे पर रखकर कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ा तब उन तस्वीरों ने देश को झकझोर के रख दिया. उसके ठीक बाद नींद से जागी नवीन पटनायक सरकार ने राज्य में 'महापर्याण' नाम से एक योजना शुरु की जिसमें अस्पताल से मृत शरीर को ले जाने के लिए मुफ्त में वाहन की सुविधा की गई थी.
सरकार की कोशिशों के बावजूद ओडिशा के जाजपुर जिले में एक और 'दाना मांझी' की घटना समाने आई है. दरअसल यहां के मधुवन सामुदायिक चिकित्सालय में कलिया मुंडा नाम के शख्स ने अपनी मां मैना को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया था. कलिया का आरोप है कि उसकी मां की मौत के बाद उसे मां के पार्थिव शरीर को कंधों पर रखकर अंतिम संस्कार के लिए अपने गांव तक ले जाना पड़ा.
कालिया ने कहा कि अस्पताल की ओर से पार्थिव शरीर ले जाने के लिए कोई भी वाहन मुहैया नहीं कराया गया. मृतक मैना की बहु शांति ने बताया कि कुछ दिनों पहले दाना मांझी की घटना सामने आने के बाद सरकार ने मृत शरीर को ले जाने के लिए योजना भी चलाई थी उसके बाद भी उन्हें अस्पताल की ओर से वाहन की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई.
मधुवन सामुदायिक चिकित्सालय जाजपुर जिले के रसूलपुर ब्लॉक के तहत आता है जहां ये 'शर्मानक घटना' हुई है. अस्पताल के प्रभारी डॉ दीपक साहू ने बताया कि स्थानीय स्तर पर सरकार की योजना के लिए कोई जागरुकता अभियान नहीं चलाया गया. उन्होंने कहा कि जब अस्पताल के पास ऐसा कोई मामला आता है तो हम जिला मुख्यालय से ड्राइवर को फोन कर वाहन को बुलाते हैं. साथ ही किसी आपात स्थिति में किराए पर भी वाहन लेने की व्यवस्था की जाती है.