डीडीए की हाउसिंग स्कीम में लग रहे तमाम आरोपों को डीडीए ने सिरे से खारिज कर दिया है. डीडीए ने सीधे सीधे कहा है कि उसकी तरफ से ना तो ड्रा में, और ना ही आवेदन पत्रों की जांच में कोई चूक हुई है.
डीडीए के मुताबिक अगर किसी ने फॉर्म में फर्जी ब्यौरे लिख दिए हैं, तो दिक्कत उसी को होगी ना कि डीडीए को और ऐसी सूरत में अगर किसी का आवंटन रद्द होता है, तो उसके लिए 200 लोगों की वेटिंग लिस्ट अलग से बनाई गई है, जिन्हें बचे हुए फ्लैटों के आवंटन में प्राथमिकता दी जाएगी.
डीडीए की तरफ से प्रवक्ता नीमो धर और हाउसिंग कमिश्नर आत्मा मंजर ने पत्रकारों को सबसे पहले डीडीए की तरफ से तमाम आरोपों पर पूरी सफाई दी, और फिर पत्रकारों के तमाम सवालों के जवाब भी.
डीडीए के मुताबिक पांच हजार से कुछ ज्यादा फ्लैटों के कब्जे के लिए जब सफल आवेदकों से ब्यौरे मांगे जाएंगे, तो इस बात की तस्दीक खुद बा खुद हो जाएगी, कि किसी के नाम पर दिल्ली में पहले से तो कोई फ्लैट या मकान नहीं है, और किसी को एक से ज्यादा आवंटन तो नहीं हो रहे.
डीडीए ने ये भी माना कि दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने उनसे कुछ ब्यौरे मांगे हैं, और पुलिस की जांच में वो हर तरह का सहयोग देने को तैयार हैं.