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विवाद के बावजूद नहीं प्रभावित होंगे चीन के साथ रक्षा संबंध: एंटनी

कश्मीर से जुड़े एक शीर्षस्‍थ सैन्य अधिकारी को वीजा न देने के चीन के कदम के बावजूद रक्षा मंत्री ए के एंटनी ने इस बात से इनकार कर दिया है कि इससे बीजिंग के साथ रक्षा संबंध प्रभावित होंगे.

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कश्मीर से जुड़े एक शीर्षस्‍थ सैन्य अधिकारी को वीजा न देने के चीन के कदम के बावजूद रक्षा मंत्री ए के एंटनी ने इस बात से इनकार कर दिया है कि इससे बीजिंग के साथ रक्षा संबंध प्रभावित होंगे.

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एक समारोह के बाद उन्होंने इस संबंध में संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह चीन के साथ रक्षा संबंध तोड़ने का प्रश्न नहीं है. हमारे चीन के साथ करीबी संबंध हैं, हालांकि समय-समय पर उनमें कुछ परेशानी आती है.’’ मंत्री से पूछा गया था कि क्या हालिया विवाद के बाद भारत चीन के साथ रक्षा संबंध तोड़ने के बारे में विचार कर रहा है.

रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘कुछ समय की परेशानियों के कारण भारत के चीन के साथ संपूर्ण संबंधों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.’’ चीन ने नॉर्दर्न सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल बी एस जसवाल को चीन का वीजा देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया है कि जसवाल ‘संवेदनशील’ जम्मू-कश्मीर से संबंधित हैं.

यह पूछे जाने पर कि क्या रक्षा उत्पादन क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को 49 फीसदी तक बढ़ाया जा रहा है, उन्होंने कहा, ‘‘हमने अभी अपने रक्षा उत्पादन क्षेत्र में 26 फीसदी एफडीआई की अनुमति दी है.’’ एंटनी ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत का रक्षा उत्पादन बढ़ रहा है, हालांकि इसमें अभी और सुधार की गुंजाइश है.{mospagebreak}रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘हमारा मुख्य उद्देश्य भारत को रक्षा उद्योग उत्पादन क्षेत्र में मजबूत बनाना है. हम इस क्षेत्र को केवल सार्वजनिक क्षेत्र तक सीमित नहीं रखना चाहते और हम निजी क्षेत्र का भी समर्थन करेंगे, लेकिन हमें सार्वजनिक क्षेत्र को भी प्रोत्साहित करना होगा.’’ नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में रक्षा संबंधी मुद्दों पर अनियमितताओं की ओर ध्यान दिलाया है, जिसके बारे में एंटनी ने कहा, ‘‘हम कैग के परीक्षणों को हमेशा सकारात्मक तौर पर लेते हैं. इसके लिए हम संवैधानिक निकायों और यहां तक कि मीडिया की ओर से हो रहीं आलोचनाओं को भी सकारात्मक तौर पर लेते हैं, लेकिन अतीत को भूल जाइए.’’

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