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विजय गोयल के कारण परेशान हुए राजनाथ सिंह!

दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष के नाते विजय गोयल भले पार्टी का प्रमुख चेहरा बनने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन उनकी कार्यशैली से खफा प्रदेश से इतनी शिकायतें आने लगी हैं कि खुद बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह परेशान हो गए हैं.

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विजय गोयल
विजय गोयल

दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष के नाते विजय गोयल भले पार्टी का प्रमुख चेहरा बनने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन उनकी कार्यशैली से खफा प्रदेश से इतनी शिकायतें आने लगी हैं कि खुद बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह परेशान हो गए हैं.

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सूत्रों के मुताबिक राजनाथ सिंह के पास पिछले कुछ दिनों तक लगातार 100-150 शिकायतें आ रही थी. गोयल से नाराज स्थानीय नेता लिखित या मिलकर या फोन से अपनी शिकायतें दर्ज करा रहे थे. लेकिन अब राजनाथ खुद को रिलैक्स महसूस कर रहे हैं. वजह यह है कि उन्होंने पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी को दिल्ली का चुनाव प्रभारी बना दिया है और अब दिल्ली से मिलने आने वालों को सीधे गडकरी से मिलने के लिए भेज दिया जाता है.

राजनाथ ने अपने मातहतों को यहां तक निर्देश दे दिया है कि दिल्ली प्रदेश के किसी नेता-कार्यकर्ता का फोन आए तो बाकायदा मिलने का उद्देश्य पूछा जाए और गोयल के खिलाफ कोई शिकायत जैसी बात हो तो सीधे गडकरी से मिलने के लिए कह दिया जाए.

गोयल के खिलाफ बढ़ते असंतोष और उनकी कार्यशैली की वजह से ही पार्टी ने किसी को भी दिल्ली में बतौर मुख्यमंत्री उम्मीदवार उतारने का मन नहीं बनाया है. एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, ‘राजनाथ सिंह जी पहले ही कह चुके हैं कि दिल्ली में गोयल को बतौर सीएम प्रोजेक्ट करना तो नामुमकिन है ही, बाकी किसी और को भी फिलहाल प्रोजेक्ट करना मुमकिन नहीं है.’

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गोयल भी गलतफहमी में नहीं रहे, इसलिए आलाकमान ने साफ-सुथरी छवि के नेता और पूर्व मंत्री डा. हर्षवर्धन को चुनाव अभियान समिति की कमान सौंप दी है. शायद गोयल इशारा समझ गए होंगे, वैसे भी चुनाव अभियान समिति के मुखिया की बीजेपी में आजकल कितनी अहमियत है, पार्टी के नेता बखूबी जानते हैं. बीजेपी इससे पहले उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ में भी बिना किसी चेहरे को प्रोजेक्ट किए चुनाव लड़ चुकी है.

उत्तराखंड में तो चुनाव अभियान समिति के मुखिया बी.सी. खंडूरी को ही मुख्यमंत्री की कमान मिली थी.

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