जामिया मिल्लिया इस्लामिया इन दिनों सुर्खियों में है. यहां के छात्रों ने नए नागरिकता कानून के खिलाफ विरोध का बिगुल फूंका, जिसने बाद में हिंसक रूप ले लिया. उसके बाद से ही यूनिवर्सिटी और यहां के छात्र चर्चा में हैं. वैसे कहा जाता है कि राष्ट्रीय आंदोलन की देन है यह यूनिवर्सिटी, ऐसे में आइए नजर डालते हैं आजादी की लड़ाई में शामिल इस यूनिवर्सिटी के इतिहास के उस हिस्से को.
देश को आजाद कराने के लिए कई आंदोलन चलाए गए और उन्हीं में असहयोग और खिलाफत आंदोलन रहे, जिससे जामिया मिल्लिया का जन्म हुआ. बता दें कि जामिया मिल्लिया की स्थापना 1920 में अलीगढ़ में एक संस्थान के रूप में की गई थी. इसकी आधारशिला स्वतंत्रता सेनानी मौलाना महमूद हसन ने रखी थी. वहीं, जामिया के संस्थापक नेताओं में से अली ब्रदर्स के नाम से मशहूर मुहम्मद अली जौहर और शौकत अली भी थे.
उस वक्त भारत में ब्रिटिश शासन था. 20वीं सदी के पहले दशक में ब्रिटेन ने मुस्लिम देश तुर्की में दखल देना शुरू किया. वहां के खलीफा को मुस्लिम के धार्मिक प्रधान के रूप में देखा जाता था. ऐसे में अंग्रेजों पर दबाव बनाने के लिए अली ब्रदर्स, मालैाना आजाद, हसरत मोहानी और हकीम अजमल खान के नेतृत्व में खिलाफत आंदोलन चलाया गया, जो बाद में 1924 में खलीफा पद समाप्त होने के साथ ही खत्म हो गया.
वहीं, इस दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नेतृत्व में 1 अगस्त 1920 को अंग्रेजों के खिलाफ पहला जन आंदोलन शुरू हुआ. 1920 से 1922 के बीच महात्मा गांधी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन चलाया गया. तब महात्मा गांधी ने ब्रिटिश शासन के जरिए चलाए जा रहे सभी शैक्षणिक संस्थानों का विरोध करने को कहा. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के इस कॉल पर राष्ट्रवादी शिक्षकों और छात्रों के एक समूह ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छोड़ दिया, क्योंकि ये सभी ब्रिटिश सहयोग का विरोध कर रहे थे.
ये थे आंदोलन के प्रमुख सदस्य
इस आंदोलन के सदस्यों में मौलाना महमूद हसन, मौलाना मोहम्मद अली, हकीम अजमल खान, डॉ. मुख्तार अहमद अंसारी और अब्दुल मजीद ख्वाजा प्रमुख थे. इसके बाद ही जामिया मिलिया इस्लामिया महात्मा गांधी, मौलाना महमूद हसन और मोहम्मद अली जौहर का ड्रीम प्रोजेक्ट बन गया. इस तरह जामिया मिल्लिया इस्लामिया उन शिक्षण संस्थानों में से एक है, जो ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के जरिए चलाए जा रहे संस्थानों का बहिष्कार कर स्वतंत्रता संग्राम के राष्ट्रवादी आह्वान के जवाब में अस्तित्व में आया.
असहयोग और खिलाफत आंदोलन के दौरान ही 29 अक्टूबर 1920 को अलीगढ़ में जामिया की स्थापना एक संस्थान के रूप में की गई. इसकी स्थापना में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की भूमिका अहम रही. बाद में जामिया को साल 1925 में अलीगढ़ से दिल्ली लाया गया, तब जामिया को दिल्ली के करोलबाग में शिफ्ट किया गया. 1 मार्च 1935 को इसे दिल्ली के ओखला में लाया गया और उसके बाद 1936 में इसे नए कैंपस में शिफ्ट किया गया, जहां जामिया के सभी संस्थान लाए गए.
वहीं, जामिया को दिसंबर 1988 में भारतीय संसद में एक एक्ट के तहत संस्थान से यूर्निवर्सिटी का दर्जा मिला और तब यह सेंट्रल यूनिवर्सिटी में तबदील हो गई. बता दें कि उर्दू में जामिया का मतलब यूनिवर्सिटी और मिल्लिया का मतलब राष्ट्रीय है.
हालांकि, जामिया मिलिया के लिए एक वक्त ऐसा भी आया, जब ये यूनिवर्सिटी आर्थिक संकट से गुजर रही थी, तब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था कि जामिया को बचाना है, वो कटोरा लेकर भीख मांगने को भी तैयार हैं. आजादी से पहले जामिया को कई बार आर्थिक संकट से जूझना पड़ा. कई बार तो इसे बंद करने की नौबत भी आई.
जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी आज दिल्ली में है, जो पहले अलीगढ़ में थी. ब्रिटिश शासन के दौरान पश्चिमी शिक्षा के विरोध और स्वतंत्रता आंदोलन के लिए अलीगढ़ में जामिया मिल्लिया इस्लामिया की स्थापना की गई थी. जामिया मिल्लिया की अलीगढ़ में स्थापना के साथ इसे दिल्ली शिफ्ट करने में महात्मा गांधी की अहम भूमिका रही.
बता दें कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया के बारे में मशहूर कवि रवींद्रनाथ टैगोर ने कहा था कि भारत के सबसे प्रगतिशील शैक्षिक संस्थानों में से एक है. वहीं, मशहूर कवयित्री सरोजिनी नायडू ने कहा था तिनका-तिनका जोड़कर और तमाम कुर्बानियां देकर जामिया का निर्माण किया गया है.