दिल्ली में चुनाव से महज 8 दिन पहले बीजेपी ने अपने अभियान में आक्रामकता और ताकत फूंकने की तैयारी कर ली है. ज्यादातर ओपिनियन पोल्स के मुताबिक, दिन-ब-दिन के साथ आम आदमी पार्टी की स्थिति मजबूत होती जा रही है. ऐसे में हो सकता है कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को पार्टी का विजय रथ दिल्ली में रुकने की आशंका रही हो. इसीलिए दिल्ली में एक मंथन बैठक के बाद पार्टी ने अपने सभी तरह के संसाधनों का खजाना खोल दिया है.
चुनाव से आठ दिन पहले बीजेपी ने अब यह चुनावी अट्ठा लगाया है.
1. आने वाले सात दिनों में पार्टी 250 छोटी-छोटी चुनावी सभाएं करेंगी. दरअसल अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में प्रचार की यही नीति अपनाई है. वह रोजाना चार-पांच छोटी सभाओं को संबोधित करते हैं. बीजेपी के स्टार कैंपेनर नरेंद्र मोदी सुरक्षा के तामझाम के चलते इस तरह की छोटी रैलियां संबोधित नहीं कर सकते. लिहाजा अब पार्टी के केंद्रीय मंत्री और सांसद मिलकर छोटी सभाएं करने का जिम्मा लेंगे.
2. बीजेपी सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों में एक हजार बैनर लगाएगी. इस मोर्चे पर भी सीमित संसाधनों के बावजूद आम आदमी पार्टी अब तक बीजेपी से ज्यादा मुखर दिखी है. अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने बेहद चालाकी से दिल्ली भर में अहम जगहों पर पोस्टर और बैनर तान दिए हैं. बीजेपी के भी खूब बैनर-होर्डिंग लगे हैं, पर चुनावी विज्ञापनों में AAP की मजबूत उपस्थिति उसके लिए मुश्किल का सबब तो है ही.
3. अरविंद केजरीवाल पर पार्टी रोजाना पांच सवाल दागेगी और उनकी ही शैली में उन्हें घेरने की कोशिश करेगी.
4. देश भर से बीजेपी के 120 सांसद दिल्ली में चुनाव प्रचार करने उतरेंगे. इन्हें अलग-अलग सीटों पर छोटी सभाएं करने का काम सौंपा जाएगा. ये अमित शाह के निर्देशों को जमीनी स्तर पर लागू करने का काम भी करेंगे. इसके अलावा पार्टी ने जिन स्टार प्रचारकों की सूची चुनाव आयोग को सौंपी है, वे भी दिल्ली में सभाएं करेंगे. सुषमा स्वराज और स्मृति ईरानी समेत कई केंद्रीय कैबिनेट मंत्री पहले ही चुनाव प्रचार में उतर चुके हैं.
5. 13 राज्यों से बीजेपी के कार्यकर्ता दिल्ली पहुंच रहे हैं. दिल्ली में संघ और बीजेपी का भी पर्याप्त काडर है, पर कम समय को देखते हुए बीजेपी ने कार्यकर्ताओं की फौज दूसरे प्रदेशों से आयात की है.
6. पार्टी विधानसभा चुनाव के लिए घोषणापत्र नहीं जारी करेगी. इसकी जगह विजन डॉक्युमेंट जारी किया जाएगा. घोषणापत्र इस बात का दस्तावेज है कि सरकार बनने पर पार्टी अपने कार्यकाल में किन-किन मुद्दों पर क्या काम करेगी. लेकिन विजन डॉक्युमेंट पार्टी का वह दस्तावेज है जिसमें उसके अंतिम लक्ष्यों का ब्योरा होता है. सरल भाषा में आप यह कह सकते हैं कि घोषणापत्र सामान्य तौर पर 5 सालों के लिए होता है, जबकि विजन डॉक्युमेंट पांच साल के कार्यकाल की सामयिक पाबंदी से मुक्त होता है. इससे साफ है कि पार्टी बिजली की कीमतें आधी करने जैसा कोई वादा नहीं करने वाली.
7. पार्टी ने दिल्ली में रिकॉर्डतोड़ जीत और दो तिहाई बहुमत (कम से कम 46 सीटें) हासिल करने का लक्ष्य रखा है. कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए कम से कम प्रचारित तो ऐसा ही किया है.
8. चुनावी कैंपेन में आरएसएस के लोग भी अहम भूमिका निभाएंगे. हर विधानसभा क्षेत्र में एक-एक संघ प्रचारक चुनाव अभियान में सेतु का काम करेंगे. संघ के स्वयंसेवक बीजेपी समर्थकों को 100 फीसदी वोटिंग करने के लिए प्रेरित करेंगे और बूथ स्तर पर बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ काम करेंगे. कृष्ण गोपाल आहूजा को पूरे प्रदेश के लिए आरएसएस की ओर से प्रभारी बनाया गया है.