भारत में बुलेट ट्रेन चलने में बेशक अभी देर हो लेकिन कम रफ्तार वाली देसी बुलेट ट्रेनें इस साल के अंत में दौड़ने लगेंगी.
एक वेबसाइट के मुताबिक रेलवे अगले एक साल के भीतर देसी बुलेट ट्रेन चलाने जा रही है. इनकी औसत रफ्तार 130 किलोमीटर प्रति घंटे होगी. इसका मतलब यह हुआ कि यह राजधानी और शताब्दी जैसी तेज ट्रेनों से भी तेज होंगी. ये ट्रेनें दिल्ली से चंडीगढ़ तक की 266 किलोमीटर की दूरी सिर्फ दो घंटे में पूरी कर लेंगी. इस समय इस रूट की सबसे तेज ट्रेन शताब्दी एक्सप्रेस को यह दूरी पूरी करने में 3 घंटे 20 मिनट लगते हैं.
शुरू में ये ट्रेनें तीन रूटों पर चलेंगी. ये हैं-दिल्ली-चंडीगढ़, दिल्ली-लखनऊ और दिल्ली-भोपाल.
इन ट्रेनों को चलाने के लिए जो ट्रैक चाहिए उनकी लागत बहुत ही कम है, ढाई करोड़ रुपए प्रति किलोमीटर जबकि असली बुलेट ट्रेन के ट्रैक बनाने का खर्च 200 रुपए प्रति किलोमीटर है. ये आंकड़े रेलवे की सलाहकार कंपनी राइट्स ने दिए हैं.
रेलवे की योजना है कि हर दिन एक या दो ट्रेनें चलाई जाएं. इनके लिए यात्रियों को अधिक किराया देना होगा. लेकिन इन ट्रेनों के डिब्बे वगैरह परंपरागत ही रहेंगे.
रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हमें यथार्थवादी होना होगा. बुलेट ट्रेन बहुत खर्चीला है. हम फिलहाल औसत 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें चला रहे हैं और उन्हें रातों-रात 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चला देना अंसभव है. तेज रफ्तार की ट्रेनें चलाना अभी हमारी वरीयता नहीं है. अभी हम अपनी औसत स्पीड 130 किलोमीटर प्रति घंटे तक ले जाना चाहते हैं.
रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अरुणेन्द्र कुमार ने कहा कि हम इस साल के अंत तक सेमी हाई स्पीड ट्रेनें चलाना चाहते हैं. इसके लिए हम सिस्टम को अपग्रेड कर रहे हैं.