रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत के दौरे पर हैं. इस बार के उनके दौरे में वैसे तो फोकस इस बात पर है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके बीच रूस के शहर सोचि में हुई अनौपचारिक बैठक के दौरान बनी समझ को आगे बढ़ाया जाए. लेकिन दोनों देश इसके लिए भी कोई रास्ता निकालने की कोशिश कर सकते हैं कि डॉलर पर निर्भरता कम की जाए और रुपया-रूबल (रूस की मुद्रा) में कारोबार आदि के लिए कोई व्यवस्था बनाई जाए.
गौरतलब है कि डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में लगातार आ रही गिरावट से भारत सरकार परेशान है. इसलिए डॉलर के इस्तेमाल की जगह दोनों देश रुपये-रूबल या किसी और ऐसी करेंसी के इस्तेमाल पर विचार कर रहे हैं, जिस पर अमेरिकी असर न हो. वैसे तो रूस तो काफी पहले से इस पर जोर देता रहा है, लेकिन पिछले वर्षों में रूबल में आई गिरावट की वजह से भारत ही इसे लेकर हिचक रहा था.
इंडिया टुडे-आजतक को जानकारी मिली है कि दोनों देशों की सरकारें और कारोबारी इस पर बात कर रहे हैं कि भुगतान और लेन-देन में रुपये और रूबल के इस्तेमाल पर कोई व्यवस्था बनाई जाए ताकि दोनों देशों में आर्थिक, व्यापारिक और रक्षा क्षेत्र में सहयोग निर्बाध तरीके से जारी रहे.
रूस की गैसप्रोम बैंक के भारतीय प्रतिनिधि मित्रेयकिन ने इंडिया टुडे-आजतक को बताया कि बैंकिंग समुदाय तो पिछले दो-तीन साल से ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग कर रहा है. उन्होंने कहा कि इस पर सिर्फ बात करने से काम नहीं होगा और कुछ ठोस उपाय करने होंगे.
मित्रयेकिन ने कहा, 'मुझे पूरा भरोसा है कि यह व्यवस्था पूरी तरह से कारगर हो सकती है. मसला बस इतना है कि हर कोई डॉलर में काम करने का आदी हो चुका है. इसके लिए ढांचा मौजूद है, बैंक खाते हैं और प्रक्रियाएं भी हैं. रुपये-रूबल में आपको यह सब करना होगा, जिसके लिए समय और धन खर्च होगा.'
प्रधानमंत्री मोदी और रूस के राष्ट्रपति पुतिन डिफेंस से लेकर न्यूक्लियर एनर्जी, अंतरिक्ष, अर्थव्यवस्था जैसे कई क्षेत्रों में करीब 20 समझौतों पर दस्तखत कर सकते हैं.