रक्षा अनुसंधान और रक्षा संगठन (DRDO) ने सोमवार को पोखरण रेंज से मल्टीबैरल पिनाका रॉकेट प्रणाली का सफलतापूर्वक परीक्षण किया. यह रॉकेट प्रणाली लंबी दूरी से दुश्मन के ठिकानों को ध्वस्त करने में सक्षम है. सोमवार को इसके 2 परीक्षण किए गए जो पूरी तरह सफल रहे. दोनों परीक्षणों में 90 किमी दूर स्थित लक्ष्य को ध्वस्त करने में सफलता हासिल की गई.
डीआरडीओ के अनुसार यह हथियार भारतीय सेना की आर्टिलरी में नई जान फूंकने में सक्षम है. डीआरडीओ ने आगे कहा कि टेलीमेट्री सिस्टम ने उड़ान पथ के सभी ट्रैक की निगरानी की, इससे पता चला कि सभी मिशन उद्देश्यों को पूरा किया गया है. डीआरडीओ द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित गाइडेड पिनाका को शामिल करने से तोपखाने की क्षमता को काफी बढ़ावा मिलेगा.
उन्होंने कहा कि निर्देशित पिनाका के सफल परीक्षण ने देश की तकनीकी ताकत को सटीक और आधुनिक हथियारों में परिवर्तित कर दिया है. भारतीय सेना के लिए आयुध अनुसंधान और विकास प्रतिष्ठान (ARDE)पुणे और रक्षा अनुसंधान और विकास प्रयोगशाला (DRDL) हैदराबाद, के माध्यम से पिनाका को संयुक्त रूप से विकसित किया गया है.
पीआईबी (प्रेस इन्फर्मेशन ब्यूरो) ने एक बयान में कहा है कि डीआरडीओ ने सोमवार को पोखरण रेंज से गाइडेड पिनाका का सफलतापूर्वक परीक्षण किया. हथियार प्रणाली अत्याधुनिक मार्गदर्शन किट से सुसज्जित है जिसमें एक उन्नत नेविगेशन और नियंत्रण प्रणाली शामिल है. दोनों मिशनों में, हथियार प्रणालियों ने उच्च सटीकता के साथ लक्ष्यों को प्रभावित किया और वांछित लक्ष्य हासिल किया.
Twin Success for Guided PINAKA https://t.co/z0ZFdNmDDo @DefenceMinIndia @PIB_India @SpokespersonMoD @airnewsalerts @DrSubhashMoS @drajaykumar_ias @adgpi @IAF_MCC pic.twitter.com/GsAYan3Dme
— DRDO (@DRDO_India) March 11, 2019
बता दें कि पिनाका रॉकेट प्रणाली अत्याधुनिक गाइडेंस सिस्टम से लैस है जिसमें एडवांस नेवीगेशन और कंट्रोल सिस्टम मौजूद हैं. दोनों ही परीक्षणों में रॉकेट ने अपेक्षित लक्ष्य को सफलतापूर्वक ध्वस्त कर दिया. टेस्ट में रॉकेट प्रणाली ने बेहद सूक्ष्म और सटीक निशाना लगाया. परीक्षण के दौरान रॉकेट को ट्रैक करते हुए इस पर नजर रखी गई. टेस्ट में हथियार प्रणाली ने सभी अपेक्षित उद्देश्यों को पूरा किया.
गौरतलब है कि इस रॉकेट प्रणाली ने मई 2018 में आयोजित अंतिम परीक्षणों में 70-किमी के निशान को छुआ था जिसमें पिनाका प्रणाली की दक्षता में वृद्धि का संकेत देने की बात कही गई थी. 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भी जब भारतीय सेना ने पहाड़ की चौकियों पर तैनात पाकिस्तानी चौकियों को सटीक निशाना बनाया था तब इस रॉकेट प्रणाली का प्रमुख रूप से इस्तेमाल किया गया था. पिनाका रॉकेट धीरे-धीरे रूसी SMERCH की जगह लेगा.