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चार राज्यों में होगी नक्सल विरोधी एकीकृत कमान

नक्सलियों के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई की जरूरत महसूस करते हुए माओवाद से सबसे अधिकार प्रभावित छत्तीसगढ़, झारखंड, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल ने जहां एकीकृत कमान गठित करने का निर्णय किया वहीं केन्द्र ने इस गंभीर खतरे से निपटने के लिए इन राज्यों को अतिरिक्त हेलीकाप्टर के साथ साजो सामान उपलब्ध कराने कराने की पेशकश की.

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नक्सलियों के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई की जरूरत महसूस करते हुए माओवाद से सबसे अधिकार प्रभावित छत्तीसगढ़, झारखंड, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल ने जहां एकीकृत कमान गठित करने का निर्णय किया वहीं केन्द्र ने इस गंभीर खतरे से निपटने के लिए इन राज्यों को अतिरिक्त हेलीकाप्टर के साथ साजो सामान उपलब्ध कराने कराने की पेशकश की.

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नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और प्रतिनिधियों की बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सभी राज्यों के समन्वय से इस चुनौती से निपटने और आदिवासियों को ‘संवेदनशीलता और सहृदयता’ से सेवा मुहैया कराने की जरूरत पर बल दिया. बैठक के दौरान नक्सल प्रभावित जिलों में 400 पुलिस थानों की स्थापना एवं सशक्तिकरण के प्रस्ताव को हरी झंडी दिखायी. इसके तहत प्रत्येक थानों के लिए 80:20 के अनुपात से दो करोड़ रुपये मुहैया कराया जायेगा जो दो वर्षों के लिए होगा.

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रशासन और पुलिस के संदर्भ में आदिवासियों को मुहैया करायी जा रही सेवाएं दोस्ताना नहीं हैं. उन्होंने कहा ‘हमारी आदिवासी भाइयों एवं बहनों को प्रशासन के बर्बर पुलिसकर्मियों और लालची पटवारी का सामना करना पड़ता है.’ सिंह ने जोर दिया कि भविष्य में आदिवासी क्षेत्रों में किसी तरह के विकास कार्य में स्थानीय लोगों को हिस्सेदार बनाया जाना चाहिए.’ {mospagebreak}

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मुख्यमंत्रियों की बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा ‘प्रत्येक राज्य की अपनी समस्याएं, प्रशासनिक व्यवस्थाएं, मजबूत एवं कमजोर पक्ष हैं. इस संदर्भ में राज्य केंद्रित कदम उठाये जाने की जरूरत है.’ सिंह ने कहा कि वामपंथी चरमपंथ से निपटने के लिए आपसी मुद्दों को बाधा नहीं बनने देना चाहिए. प्रधानमंत्री ने कहा ‘हमें इस समस्या का एकजुट होकर मुकाबला करना है और अपनी रणनीति को अंजाम देना है.’

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद गृह मंत्री पी चिदंबरम ने संवाददाताओं से कहा, ‘चारों राज्य उनके मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एकीकृत कमान बनाने पर सहमत हो गये हैं. सेना के रिटायर्ड मेजर जनरल इसके सदस्य होंगे.’ उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों से भी कहा गया है कि यदि वे चाहें तो एकीकृत कमान का गठन कर सकते हैं लेकिन ‘मुझे लगता है कि फिलहाल नक्सल प्रभावित अन्य राज्यों में एकीकृत कमान की आवश्यकता नहीं है.’

चिदंबरम ने कहा कि एकीकृत कमान जम्मू-कश्मीर और असम जैसे राज्यों में पहले से काम कर रही है. उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित राज्यों में विकास से जुडे कार्यक्रमों की एकीकृत योजना तैयार की जा रही है, जिसे 24 जुलाई को होने वाली राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठक में पेश किया जाएगा. गृह मंत्री ने बताया कि केन्द्र की ओर से नक्सल प्रभावित राज्यों के लिए आठ योजनाएं पेश की गयीं थीं और सातों राज्यों ने इन सभी पर अपनी मुहर लगा दी है. {mospagebreak}

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चिदंबरम ने कहा कि इन आठ योजनाओं को सुरक्षा संबंधी कैबिनेट समिति ने मंजूरी दी थी. राज्यों के मुख्यमंत्रियों और प्रतिनिधियों की ओर से उठाये गये मुद्दों के बारे में पूछने पर गृह मंत्री ने कहा कि राज्यों ने सैटेलाइट फोन को और उदार ढंग से इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी है. इसके अलावा जिला केन्द्रित योजना के तहत और जिले शामिल करने का प्रस्ताव भी आया. फिलहाल जिला केन्द्रित योजना 35 जिलों में चल रही है.

उन्होंने बताया कि राज्यों ने सशस्त्र सेनाओं में विशेष भर्ती अभियान चलाकर आदिवासी युवकों को नौकरी देने की मांग उठायी. कुछ ने और स्कूल बनाने की तो कुछ ने इंडियन रिजर्व बटालियन बढ़ाने की मांग की. चिदंबरम ने बताया कि कुल 34 इंडियन रिजर्व बटालियनें बनाने का प्रस्ताव है, जिनमें से 21 बन चुकी हैं और 13 अन्य बनने की प्रक्रिया में हैं. {mospagebreak}

उन्होंने कहा कि राज्यों ने नक्सल रोधी कार्रवाई के दौरान केन्द्र से हवाई कार्रवाई के संबंध में सहयोग मांगा लेकिन ‘मैंने राज्यों से कहा कि फिलहाल साजोसमान के रूप में रसद और सुरक्षा जवानों को लाने ले जाने के काम में हेलीकाप्टर दिये जाएंगे.’ यह पूछने पर कि क्या किसी राज्य ने नक्सल प्रभावित इलाकों में सेना तैनात करने की मांग भी उठायी, उन्होंने कहा कि ऐसी मांग किसी राज्य की ओर से नहीं आयी. चिदंबरम ने बताया कि सातों राज्यों से कहा गया है कि वे अपने यहां पुलिस बलों में रिक्त 97 हजार पदों पर साल के अंत तक भर्ती सुनिश्चित करें. साथ ही नक्सल प्रभावित इलाकों में ‘पुलिस कार्रवाई तथा विकास’ की दोस्तरीय नीति को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है.

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गृह मंत्री ने कहा कि हम नक्सल प्रभावित इलाकों में बड़ी संख्या में हेलीकाप्टर तैनात करने की योजना बना रहे हैं लेकिन हेलीकाप्टरों की उपलब्धता पर तैनाती निर्भर करेगी. ‘भारतीय वायुसेना ने वायदा किया है कि वह अधिक से अधिक संख्या में हेलीकाप्टर मुहैया कराएगी.’ उन्होंने कहा कि वायुसेना के हेलीकाप्टर फिलहाल संयुक्त राष्ट्र की ड्यूटी पर तैनात हैं और वायुसेना ने कहा है कि जितनी जल्दी संभव होगा, इन हेलीकाप्टर को देश में लाया जाएगा और एक एक करके नक्सल प्रभावित इलाकों में तैनात किया जाएगा. यह पूछने पर कि कुल कितने अतिरिक्त हेलीकाप्टरों की तैनाती की जाएगी, चिदंबरम ने कहा कि कम से कम 20 से 23 अतिरिक्त हेलीकाप्टर तैनात करने की योजना है.

चिदंबरम ने कहा कि सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों, झारखंड के राज्यपाल और पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य मंत्री ने बैठक के दौरान हस्तक्षेप किया और सकारात्मक विचार रखे. सभी राज्यों ने केन्द्र के साथ मिलकर नक्सल समस्या से निपटने की प्रतिबद्धता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि भाकपा-माओवादी उग्रवादियों से निपटने के मामले में कुछ सफलताएं मिलीं तो कुछ झटकों का भी सामना करना पड़ा. ‘सभी मुख्यमंत्रियों और प्रतिनिधियों ने विश्वास जताया है कि केन्द्र की मदद से नक्सलियों की चुनौती से निपटा जा सकेगा.’

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