गंगा सफाई योजना पर केंद्र सरकार के रवैये से सुप्रीम कोर्ट ने नाखुशी जताई है. उसने बुधवार को कहा कि सरकार की कार्ययोजना 'ब्यूरोक्रेटिक' है और इससे तो गंगा 200 साल में भी साफ नहीं हो पाएगी. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह तीन हफ्ते में गंगा सफाई की चरणबद्ध योजना बनाकर पेश करे.
गंगा सफाई पर केंद्र सरकार के एफिडेविट पर सुप्रीम कोर्ट असंतुष्ट है और वह गंगा सफाई अभियान को जल्द से जल्द अमलीजामा पहनाने के पक्ष में है. शीर्ष कोर्ट ने केंद्र से कहा है कि वह गंगा सफाई योजना को सामान्य भाषा में समझना चाहता है. कोर्ट ने कहा, 'कोशिश करिए कि अगली पीढ़ी को गंगा अपने वास्तविक स्वरूप में मिले. हमारी जिंदगी में तो पता नहीं.'
कोर्ट ने मांगा पीपीटी प्रजेंटेशन
कोर्ट ने तीन हफ्ते में सप्लीमेंट्री हलफनामा देने को कहा है जिसमें मोदी सरकार
को योजना के हर चरण के बारे में बताना होगा और यह भी बताना होगा कि
हर चरण में सरकार की प्राथमिकता क्या होगी. कोर्ट ने पावरपॉइंट फॉरमेट में
प्रजेंटेशन मांगा है. मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को है.
कोर्ट ने यह कहा है कि अगर गंगा सफाई के काम में कोई अड़चन आ रही है या कोई म्यूनिसिपैलिटी या प्रदेश सरकार आदेशों का पालन नहीं करती तो शीर्ष कोर्ट निर्देश देने को भी तैयार है.
48 शहरों में शुरू होगा काम
गौरतलब है कि गंगा की सफाई पर केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में
रोडमैप पेश किया था. सरकार ने कहा है कि पांच राज्यों में 76 परियोजनाओं
को मंजूरी दी जा चुकी है. इन परियोजनाओं पर कुल खर्च करीब पांच हजार
करोड़ रुपये आएगा. यह खर्च राज्यों के चुनिंदा 48 शहरों में गंगा को बचाने के
लिए तीन स्तरों पर कार्यों के लिए किया जाएगा.
याद रहे कि सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद राष्ट्रीय गंगा स्वच्छता मिशन के निदेशक की ओर से यह हलफनामा हाल ही में दाखिल किया गया. सुप्रीम कोर्ट ने 13 अगस्त को नरेंद्र मोदी सरकार से कहा था कि आखिर क्यों पवित्र नदी के लिए तत्काल कदम नहीं उठाए जा रहे. साथ ही सरकार से 2500 किलोमीटर लंबी नदी को प्रदूषण मुक्त किए जाने का रोडमैप तलब किया था.