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गीता का डीएनए टेस्ट फेल, नहीं मिला परिवार

गीता एक दशक बाद अपने वतन तो लौट आई, लेकिन उसे उसके माता-पिता नहीं मिले. सहरसा के जिस जनार्दन महतो ने दावा किया था कि गीता उनकी बेटी है, उनसे गीता का डीएनए मिलान नहीं हुआ. अब हिंदुस्तान ही गीता का परिवार है. 

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सुषमा स्वराज के साथ गीता
सुषमा स्वराज के साथ गीता

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पाकिस्तान से एक दशक बाद हिंदुस्तान लौटी गीता को उसका परिवार अब भी नहीं मिला. उसके डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट आ गई है. लेकिन वह बिहार के उस परिवार से नहीं मिला, जो गीता को अपनी बेटी बता रहा था. सहरसा के जनार्दन महतो ने कहा था गीता उनकी बेटी हीरा है, जो भटकते हुए सरहद पार कर गई थी. हालांकि महतो परिवार अकेल नहीं, जिसने गीता को अपनी बेटी बताया था. उनके अलावा दूसरे परिवारों ने भी ऐसे दावे किए थे.

23 को सुषमा जाएंगी मिलने
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने बताया कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज 23 नवंबर को गीता से मिलने इंदौर जाएंगी और उसकी खैरियत लेंगी. गीता फिलहाल इंदौर के ही मूक-बधिरों के लिए बने पुनर्वास केंद्र में ही रह रही है. जब तक गीता के मां-बाप का पता नहीं चल जाता, वह इंदौर में ही रहेगी. गीता ने पाकिस्तान से लौटने पर अपने परिजनों को पहचानने से मना कर दिया था और खुद भी इंदौर के इस केंद्र में ही रहने की इच्छा जताई थी.

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विकास स्वरूप ने क्या कहा
विकास स्वरूप ने कहा, 'यह सच है कि हमने डीएनए टेस्ट किया था. महतो परिवार सामने आया था और उनकी तस्वीरें देखने के बाद शायद गीता को भी लगा था कि वही उसके माता-पिता हैं. उनका डीएनए टेस्ट भी कराया गया. लेकिन टेस्ट के नतीजे नकारात्मक आए. दूसरे परिवारों ने भी दावा किया कि गीता उनकी बेटी है. सरकार ने उन परिवारों की तस्वीरें भी गीता को भिजवाई. लेकिन गीता तस्वीरें देखकर उनमें से किसी भी नहीं पहचान पाई .'

सुषमा स्वराज ने क्या कहा
सुषमा स्वराज ने 20 अक्टूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि यह बहुत ज्यादा मायने नहीं रखता कि उसके माता-पिता मिलते हैं या नहीं. डीएनए टेस्ट मिलान खाता है या नहीं. अब वह भारत की बेटी है और हम उसका खयाल रखेंगे. उसके मुताबिक सुषमा अब गीता का हालचाल जानने इंदौर जाने वाली हैं.

एम्स ने तैयार की है रिपोर्ट
गीता और महतो परिवार के डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट दिल्ली के एम्स ने तैयार की है. स्वरूप ने बताया कि रिपोर्ट महतो परिवार को भेज दी गई है. पाकिस्तान से हिंदुस्तान लाए जाने से पहले ही यह साफ हो गया था कि गीता को उसके परिवार को सौंपने से पहले उसका डीएनए टेस्ट कराया जाएगा. यदि रिपोर्ट का मिलान नहीं हुआ तो उसे किसी को भी नहीं सौंपा जाएगा.

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बजरंगी भाईजान से आई थी चर्चा में
गीता की कहानी सलमान खान की फिल्म बजरंगी भाईजान से सामने आई थी. इस फिल्म में भी एक बच्ची भटकते हुए सरहद पार कर पाकिस्तान पहुंच जाती है और अपने परिवार से बिछुड़ जाती अलग है. गीता ने भी भारत आते ही सबसे पहले सलमान खान से मिलने की इच्छा जताई थी. साथ ही कहा था कि वह बजरंगी भाईजान देखना चाहती है.

PAK में नकार दिया था नया नाम
गीता 11 साल की थी जब पाकिस्तान पहुंची. वह कैसे आई यह तो साफ नहीं है लेकिन बताती है कि उसने खान में विस्फोट देखा और कुछ हथियारबंद लोगों से बचने के लिए दौड़ पड़ी. महतो ने दावा किया था कि वह जालंधर के करतारपुर से 2004 में बैसाखी मेले से लापता हुई थी. तब वह पंजाब में मजदूरी करते थे. सबसे पहले वह लाहौर पहुंची तो एक पालघर में उसे रखा गया. फिर ईधी फाउंडेशन ने उसकी देखभाल की. वहां उसे फातिमा नाम दिया गया. लेकिन वह हमेशा भारत के नक्शे पर झारखंड इलाके की ओर संकेत करती. बाद में उसका नाम बदलकर गीता कर दिया गया. गीता पाकिस्तान में 13 साल रही.

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