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खर्चों में कटौती करने पर उतरी केंद्र ने नई भर्तियों पर लगाई पाबंदी

राजकोषीय और चालू खाते के घाटे को नियंत्रण से बाहर जाने से रोकने के लिये सरकार ने बुधवार को खर्चों में कटौती के कई उपायों की घोषणा की. नई भर्तियों और पांच सितारा होटलों में सरकारी बैठकों तथा अधिकारियों की एक्जिक्यूटिव श्रेणी में विमान यात्रा पर भी रोक लगा दी गई.

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वित्त मंत्री पी चिदंबरम
वित्त मंत्री पी चिदंबरम

देश में मंदी और आर्थिक घाटा इतना हावी हो गया है कि इससे निपटने के लिए केंद्र सरकार ने अपने खर्चों में कटौती करने के उपायों की घोषणा की है लेकिन इससे देश के युवाओं पर सबसे अधिक मार पड़ी है क्योंकि सरकार ने नई भर्तियों पर पाबंदी लगा दी है. इसके अलावा चालू खाते के घाटे को नियंत्रण से बाहर जाने से रोकने के लिये सरकार ने पांच सितारा होटलों में सरकारी बैठकों तथा अधिकारियों की एक्जिक्यूटिव श्रेणी में विमान यात्रा पर भी रोक लगा दी गई.

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आर्थिक वृद्धि और कर राजस्व संग्रह में धीमी वृद्धि से जूझ रही सरकार ने खर्चों में कटौती के और भी कई उपायों की घोषणा की है. मंत्रालयों और विभागों से कहा गया है कि वह कोई भी नया वाहन नहीं खरीदेंगे. पिछले एक साल से खाली पड़े पदों को भरने और नये रोजगार सृजित करने पर रोक लगा दी गई है. वित्त मंत्रालय द्वारा इस संबंध में जारी प्रपत्र में इन उपायों के बारे में बताया गया है, जिनके जरिये गैर-योजनागत खर्च में 10 प्रतिशत कटौती की जाएगी.

मितव्ययिता बरतने के इन उपायों घोषणा वित्त मंत्री की विभिन्न विभागों और मंत्रालयों के वित्तीय सलाहकारों के साथ हुई बैठक के बाद की गई है. चालू वित्त वर्ष (2013-14) में राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.8 प्रतिशत पर सीमित रखने के मकसद से वित्त मंत्रालय ने सभी मंत्रालयों और विभागों को निर्देश दिया है कि वे नए वाहन नहीं खरीदें, नए पदों का सृजन न करें और पिछले एक साल से अधिक समय से खाली पदों को न भरें.

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साथ ही विभागों से कहा गया है कि विदेश जाने वाले प्रतिनिधिमंडलों का आकार बेहद छोटा रखा जाएगा. सरकार 2008-09 से ही मितव्ययिता उपाय लागू कर रही है. नवंबर 2012 में भी इसी तरह का अभियान छेड़ा गया था. वित्त मंत्रालय ने कहा कि इस तरह के उपायों का मकसद वित्तीय अनुशासन बनाना है, साथ ही यह भी देखना है कि इससे सरकार की परिचालन क्षमता प्रभावित न होने पाए.

बयान में कहा गया है, ‘मौजूदा राजकोषीय स्थिति के मद्देनजर खर्चे को तर्कसंगत बनाने और उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम इस्तेमाल करने की जरूरत है.’ विभिन्न मितव्ययिता उपायों और राजस्व वसूली तेज करने के प्रयासों से पिछले वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा 4.9 प्रतिशत पर रखने में कामयाबी मिली जबकि बजट में इसके 5.1 प्रतिशत तक रहने का अनुमान लगाया गया था. वित्त मंत्री चिदंबरम ने इससे पहले कहा कि उन्होंने सीमा रेखा तय कर दी है. राजकोषीय घाटे को चालू वित्त वर्ष के दौरान जीडीपी के 4.8 प्रतिशत से आगे नहीं जाने दिया जायेगा.

वित्त मंत्रालय ने कहा है कि मितव्ययिता उपाय स्वायत्त सरकारी संस्थानों मसलन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान और ऑल इंडिया रेडियो आदि पर भी लागू होंगे. उन्हें बजट प्रावधान से अधिक कोई अतिरिक्त राशि नहीं दी जाएगी. हालांकि मंत्रालय ने यह नहीं बताया है कि इन तरह के मितव्ययिता उपायों से सरकार को कितनी बचत होगी.

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मितव्ययिता उपायों का ब्योरा देते हुए वित्त मंत्रालय ने कहा कि ब्याज भुगतान, ऋण पुनर्भुगतान, रक्षा, पूंजी, वेतन, पेंशन और राज्यों को दिया जाने वाला अनुदान को योजनागत व्यय में अनिवार्य 10 प्रतिशत कटौती के इस कार्यक्रम से बाहर रखा गया है. मंत्रालय ने कहा है कि चालू वित्त वर्ष में ऐसे गैर योजना खर्च जिनमें कटौती की गई है, उनके लिए फिर से कोष जारी नहीं होगा. सरकारी विभागों में नई नौकरियों के सृजन के बारे में मंत्रालय ने कहा है कि नए पदों पर पूरी तरह रोक होगी. एक साल से अधिक से रिक्त पदों को भी नहीं भरा जा सकेगा. केवल कुछ विशिष्ट या बेहद आवश्यक होने पर ही ये पद भरे जा सकते हैं.

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