केंद्र सरकार ने 1993 के मुंबई हमलों के गुनहगार याकूब मेमन को फांसी के कवरेज पर तीन न्यूज चैनलों को कारण बताओ नोटिस भेजा है. इस पर ब्रॉडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन (BEA) ने आपत्ति जताई है.
बीईए देश में न्यूज चैनलों के संपादकों की सबसे बड़ी संस्था है. केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्रालय ने ये नोटिस आज तक , एबीपी न्यूज और एनडीटीवी को दिए हैं.
नोटिस में कहा गया है कि याकूब को फांसी पर इनका कंटेंट राष्ट्रपति और न्यायपालिका की अवमानना है. बीईए ने इस मुद्दे पर सरकार से बात करने का फैसला किया है. वहीं, पत्रकारों की कई संस्थाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दखल देकर ये नोटिस वापस लेने को कहा है.
इन संगठनों ने कहा है कि टीवी केबल रूल्स बदलकर मीडिया के सरकार या सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के खिलाफ खबरें दिखाने के अधिकार पर सवाल उठाना शर्मनाक है.
बीईए ने भी केबल टीवी नेटवर्क्स रूल्स में बदलाव पर चिंता जताई है. इसके तहत किसी एंटी-टेररिस्ट ऑपरेशन के कवरेज में सिर्फ ऑफिसर की ओर से समय-समय पर दी जाने वाली ब्रीफिंग ही दिखाने की अनुमति है.
बीईए खुद भी आतंकी घटनाओं के लाइव विजुअल कवरेज के पक्ष में नहीं है. लेकिन यह भी मानता है कि मीडिया कवरेज को आधिकारिक ब्रीफिंग तक सीमित नहीं किया जा सकता. याकूब को नागपुर जेल में 30 जुलाई की सुबह फांसी दी गई थी.