वस्तु व सेवा कर (GST) बिल और भूमि अधिग्रहण विधेयक (लैंड बिल) में संशोधन पर मोदी सरकार फंसती दिख रही है. संसद के दोनों सदनों में मौजूदा सत्र में सरकार के इन दोनों महत्वपूर्ण बिलों का पास होना असंभव सा दिख रहा है. समझा जा रहा है कि मोदी सरकार न चाहते हुए भी इन दो बिलों को संसदीय समिति के पास भेजने का मन बना चुकी है.
एक अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, लोकसभा से पहले ही पास हो चुके GST बिल को सरकार राज्यसभा की एक समिति के पास भेजने को सहमत हो सकती है. इसके अलावा लैंड बिल संशोधन विधेयक को संयुक्त समिति के पास भेजा जाएगा, जिसमें दोनों सदनों के सदस्य होते हैं. एक तय समय-सीमा के अंदर समिति को दोनों विधेयकों पर अपनी सिफारिशें देनी होंगी.
सरकार से जुड़े सूत्र ने कहा, 'राज्यसभा में हमारे पास 147 सांसदों का सपोर्ट है. अगर विधेयक सिर्फ बहुमत के आधार पर पास होने लायक होता तो हम यह कर चुके होते. चूंकि यह संविधान संशोधन विधेयक है, इसलिए हम कोई जोखिम नहीं उठाना चाहते.' आपको बता दें कि संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए सदन में आधे से ज्यादा सदस्यों की उपस्थिति जरूरत होती है और इनमें से दो-तिहाई का विधेयक पर समर्थन भी होना चाहिए. फिलहाल राज्यसभा में 244 सदस्य हैं.
राज्यसभा में GST बिल सोमवार को रखे जाने की संभावना है, जबकि लैंड बिल को लोकसभा में बुधवार को पेश किया जाएगा. जिस संयुक्त समिति के पास लैंड बिल संशोधन विधेयक भेजा जाएगा, उसका गठन लोकसभा स्पीकर करेंगी. इस समिति में बीजेपी के ज्यादा सदस्य होंगे क्योंकि लोकसभा में यह पार्टी बहुमत में है.
कांग्रेस ने पूरी तैयारी कर रखी है कि इस सत्र में GST बिल पास न हो पाए. कांग्रेस को बिल पर मनाने के लिए वित्तमंत्री अरुण जेटली ने राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद से दो बार मीटिंग की. संसदीय कार्य मंत्री वैंकया नायडू भी इनमें से एक मीटिंग में थे. हालांकि दोनों बिलों के विरोध के मुद्दे पर अन्य विपक्षी दल कांग्रेस के साथ नहीं हैं, फिर भी कांग्रेस को भरोसा है कि वह कम से कम इस सत्र में मोदी सरकार को झुका सकने में सक्षम होगी.