अगर आप समझते हैं कि फेसबुक का मतलब सिर्फ अपने दोस्तों से चैटिंग करना और टाइम पास करना ही है, तो एक बार फिर से सोच लीजिए. क्योंकि फेसबुक ने वो कमाल कर दिखाया है जो अब तक हिन्दी फिल्मों में ही होता था और वो भी भगवान ही कर सकते थे. पुणे के एक परिवार के लिए फेसबुक ने वही काम किया है. इस परिवार को 12 साल पहले खोया अपना बेटा मिल गया है.
जिस तरह से हिन्दी फिल्मों में दो भाई बिछड़ते हैं और अलग-अलग धर्मों में पलने लगते हैं और बड़े होकर मिलते हैं. इस मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ. घर से भागा हुआ यह लड़का सिख बनकर लुधियाना के पास मोगा जिले के एक गुरुद्वारे में रहता था.
एक सरदार के रूप में उसका नाम गुरुबाज सिंह है, जबकि असल में उसका नाम अंकुश डोमले है और वह हिन्दू है. अंकुश उर्फ गुरुबाज सिंह 2001 में उस समय घर से भाग गया था जब उसके मामा ने उसकी पिटायी कर दी थी. उसने नांदेड़ की ओर जाने वाले एक ट्रक में लिफ्ट ली. यहां वह गुरुद्वारे के बाहर रहता और यहां आने वाले भक्तों की सेवा करता था. यहीं पर उसने गुरुबानी सीखी और सिख बन गया.
इस दौरान वह अपने परिवार को भी ढूंढ़ता रहा, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी. उसके पास अपने परिवार तक पहुंचने का सिर्फ एक ही रास्ता था और वह उसके चाचा का टेलीफोन नंबर था. लेकिन उसके परिवार ने मकान बदल लिया था, जिस कारण वह अपने परिवार से मिल नहीं पाया. आखिरकार पिछले हफ्ते उसने फेसबुक की मदद ली. उसने फेसबुक पर अपने छोटे भाई को ढूंढने की कोशिश की और सफलता हाथ लग गई.
गुरुबाज उर्फ अंकुश बताता है कि उसने फेसबुक पर अपने भाई को पहचाना और उसे फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी और उसके छोटे भाई ने रिक्वेस्ट कबूल भी कर ली. उसने बताया कि वह उसका खोया हुआ भाई है. अंकुश के परिवार में उसकी मां, भाई और अन्य लोगों को इस बात पर यकीन ही नहीं हुआ, उन्हें लगा कि कोई उनसे मजाक कर रहा है. लेकिन बाद में मां ने अपने बेटे को पहचान लिया.
अंकुश की मां कहती हैं, ‘मुझे यकीन था कि वो एक दिन वापस आ जाएगा. पुलिस के पास जाने के डर से मैंने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज नहीं करवाई. उसके गायब होने से दो साल पहले ही उसके पिता की मौत हो चुकी थी.’ उसके भाई ने बताया कि पहले तो उसे यकीन ही नहीं हुआ कि वो उसका भाई है. जब उसने फोन पर बात की और सारी जानकारी दी तो उसने फ्रेंड रिक्वेस्ट कबूल कर ली.