दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को कथित रूप से 'सार्वजनिक कोष बरबाद कर' मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी को महिमामंडित करने वाला प्रचार अभियान एवं विज्ञापन प्रसारित करने से रोकने से आज इनकार कर दिया.
इस बीच, मुख्य न्यायमूर्ति जी रोहिणी और न्यायमूर्ति जयंत नाथ ने केन्द्र सरकार के वकील को निर्देश लेने के लिये कहा कि उन्होंने इस साल मई में उच्चतम न्यायालय के फैसले में दिए गए मार्गनिर्देशों पर क्या कदम उठाया गया है.
खंडपीठ ने कहा, 'आपने उच्चतम न्यायालय के मार्गनिर्देशों पर क्या कदम उठाया है उसपर निर्देश लें. केन्द्र इस याचिका में उठाए गए मुद्दों पर निर्देश लेगा तभी हम इस पर (जनहित याचिका में किए गए आग्रह पर) विचार करेंगे.' अदालत ने कहा कि वह इस मामले में 27 जुलाई को सुनवाई करेगी.
अदालत कांग्रेस नेता अजय माकन की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें उन्होंने 'दिल्ली सरकार को अपने ऑडियो-विजुअल टीवी विज्ञापनों और साथ ही अपने मौजूदा विज्ञापनों को प्रसारित करने से' रोकने का निर्देश देने का अनुरोध किया है.
दिल्ली कांग्रेस प्रमुख माकन ने मौजूदा और भावी विज्ञापनों में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल का नाम प्रकाशित करने से दिल्ली सरकार को रोकने का भी आग्रह किया है क्योंकि यह सरकारी विज्ञापन मार्गनिर्देश, 2014 का कथित रूप से उल्लंघन है. अधिवक्ता विकास सिंह के माध्यम से दायर याचिका में अदालत से आग्रह किया गया है कि वह केन्द्र को 'सरकार विज्ञापन मार्गनिर्देश, 2014 के अनुरूप तीन सदस्यीय निकाय गठित करने के लिए' निर्देश दे. इस पर अदालत ने पूछा कि क्या केन्द्र ने मार्गनिर्देश पर अमल करने के लिए कोई कदम उठाया है.
केन्द्र के वकील अनिल सोनी और नगेन्द्र बेनीपाल ने कहा कि वे इस मुद्दे पर निर्देश लेंगे और अदालत को सूचित करेंगे.' इस बीच, केन्द्र सरकार के वकील ने आरोप लगाए कि केजरीवाल केन्द्र को निशाना बना रहे हैं और सरकार की छवि धूमिल कर रहे हैं. याचिकाकर्ता ने याचिका में कहा कि केन्द्र वह तंत्र, तीन सदस्यीय निकाय स्थापित करने में विफल रहा और दिल्ली सरकार ने इसका फायदा उठा कर टीवी, अखबारों और रेडियो पर राजनीति से प्रेरित विज्ञापन चला कर सत्तारूढ़ पार्टी को बढ़ावा दे रही है और मार्गनिर्देशों का लगातार उल्लंघन कर रही है.
माकन ने याचिका में दावा किया कि आप सरकार का विज्ञापन अभियान उच्चतम न्यायालय की ओर से तय सरकारी विज्ञापन (कंटेंट नियमन) मार्गनिर्देश, 2014 का उल्लंघन कर रहा है.
याचिका में कहा गया है, 'आप सरकार ने 25 जून को लिए गए एक फैसले में अपना विज्ञापन बजट बढ़ा लिया है. 526 करोड़ रुपये का यह आंकड़ा वर्ष 2014-15 के
23.7 करोड़ रुपये के पिछले बजटीय आबंटन के 21 गुणा ज्यादा हैं.' याचिका में कहा गया है, 'प्रतिवादी सं 2 (दिल्ली सरकार) प्रचार बजट में 500 करोड़ रुपये का यह
अभूतपूर्व विस्तार 100 स्कूलों के निर्माण पर (एक स्कूल की निर्माण लागत तकरीबन 5 करोड़ रुपये), 1000 डीटीसी बसों की खरीदारी (एक बस की लागत तकरीबन 50
लाख रुपये), ईडब्ल्यूएस श्रेणी में 10000 फ्लैट के निमार्ण (ईडब्ल्यूएस श्रेणी के एक फ्लैट की लागत तकरीबन 5 लाख रुपये) और अन्य लोक कल्याण एवं विकास उद्देश्यों
पर किया जा सकता था.'
इनपुट: भाषा