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किस तरह Covid-19 ने भारत के एविएशन सेक्टर को जमीन पर ला दिया?

दुनिया भर में कई एयरलाइंस ने 30 से 35% तक रूट्स में कटौती कर दी है. इसके अलावा पायलटों, केबिन क्रू और अन्य स्टाफ के वेतन में कटौती या उन्हें बिना भुगतान की छुट्टियों पर भेजा जा रहा है. भारत में भी लॉकडाउन की वजह से इस तरह के कदमों को देखा जा सकता है.

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कोरोना वायरस की मार एयरलाइन कंपनियों पर काफी गंभीर है (फोटो-PTI)
कोरोना वायरस की मार एयरलाइन कंपनियों पर काफी गंभीर है (फोटो-PTI)

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भारत ने जहां देश में आने वाली स्पेशल फ्लाइट्स पर भी रोक लगा दी है, इस विश्लेषण में लेखक ने पाया कि किस तरह लॉकडाउन ने भारत के एविएशन सेक्टर की कमर तोड़ दी है. इस सेक्टर की राष्ट्रीय जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में हिस्सेदारी करीब 70 अरब डॉलर की है.

सोमवार को सिविल एविएशन मंत्रालय ने वीआईपी और वीवीआईपी वाली फ्लाइट्स के देश में आने पर भी 14 अप्रैल तक रोक लगा दी. आइए एक नजर डालते हैं कि इन पाबंदियों ने कैसे देश की एविएशन इंडस्ट्री को चोट पहुंचाई है. भारत में दुनिया की कुल आबादी का पांचवा हिस्सा रहता है.

वैश्विक असर

अंतरराष्ट्रीय सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन (ICAO) ने फरवरी में जब भारत में कोरोना वायरस केस बढ़ने की रफ्तार धीमी थी, तब भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्री क्षमता में 2% की कमी आने का अनुमान लगाया था. बीमारी को महामारी घोषित किए जाने के बाद मार्च के महीने के लिए यही अनुमान बढ़कर भारत के लिए 27% हो गया.

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भारत में विदेशों से आए Covid-19 केसों की संख्या बढ़ती देख भारत सरकार ने हर तरह के इंटरनेशनल एयर ट्रैफिक पर पहले 23 से 29 मार्च तक रोक लगाई. फिर इस रोक को बढ़ाकर 14 अप्रैल तक कर दिया गया. सभी घरेलू उड़ानों को भी 24 अप्रैल मध्यरात्रि तक रोक दिया गया.

ये सारा घटनाक्रम क्षेत्र में ऑपरेट करने वाली सभी इंटरनेशनल और डोमेस्टिक एयरलाइंस फ्लाइट्स के लिए बहुत भयावह है. फरवरी के आखिर में ICAO और एयरपोर्ट काउंसिल ऑफ इंडिया (ACI) ने एशिया पैसिफिक सेक्टर में कुल 12 अरब डॉलर के नुकसान का अनुमान लगाया था. बता दें कि ये स्थिति भारत की ओर से लॉकडाउन किए जाने के बहुत पहले की है.

उत्तर अमेरिकी सेक्टर ने 14% नुकसान का अनुमान लगाया है वो भी तब जब अमेरिका में अभी डोमेस्टिक फ्लाइट्स पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई गई है. यूरोपीयन एविएशन इंडस्ट्री को महाद्वीपों में सबसे अधिक 15% घाटे का अनुमान है.

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इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) ने एविएशन इंडस्ट्री को कहीं ज्यादा नुकसान का आकलन लगाया है. IATA के CEO अलेक्जेंडरे डि जूनिएक ने 17 मार्च को एक बयान में कहा था, ‘5 मार्च को हमने इंडस्ट्री के राजस्व को 113 अरब डॉलर के घाटे का खराब से खराब स्थिति में होने का अनुमान लगाया था. हमने तब पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रमों का अंदाज नहीं लगाया था जिसमें दुनिया भर में यात्राओं पर पाबंदियां लगा दी गईं. पता नहीं कब तक ये हालात रहने वाले हैं.’

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इस बीच अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी (वित्त मंत्री) स्टीव म्नुचिन ने मंगलवार को मौजूदा स्थिति को 9/11 से भी खराब स्थिति बताया. एयरलाइन इंडस्ट्री के लिए उन्होंने कहा कि उस पर करीब करीब ब्रेक लग चुका है. अमेरिका का वित्त मंत्रालय एयरलाइन इंडस्ट्री को राहत और स्टीमुलस पेमेंट्स देने की योजना पर काम कर रहा है. हालांकि अभी इसके बारे में कोई ब्यौरा जारी नहीं किया गया है.

भारतीय एविएशन के लिए मायने?

भारतीय एविएशन सेक्टर का राष्ट्रीय जीडीपी में 72 अरब डॉलर का योगदान है. अगर इंडस्ट्री के राजस्व में 25% कटौती का अनुमान लगाया जाए तो एविएशन सेक्टर को मौजूदा लॉकडाउन के दायरे में करीब डेढ़ से 2 अरब डॉलर का नुकसान होगा.

ये विडंबना है कि Covid-19 महामारी की वजह से पहले तेल के दामों में भारी कटौती हुई जो एविएशन सेक्टर के विकास को पुश दे सकती थी लेकिन फिर मांग सूख जाने की वजह से सेक्टर को ही दुनिया भर में बाधित कर दिया.

दुनिया भर में कई एयरलाइंस ने 30 से 35% तक रूट्स में कटौती कर दी है. इसके अलावा पायलटों, केबिन क्रू और अन्य स्टाफ के वेतन मे कटौती या उन्हें बिना भुगतान की छुट्टियों पर भेजा जा रहा है. भारत में भी लॉकडाउन की वजह से इस तरह के कदमों को देखा जा सकता है.

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भारतीय एविएशन सेक्टर को तत्काल राहत तो डोमेस्टिक फ्लाइट्स के शुरू होने पर ही मिल सकती है. ये अब 15 अप्रैल को कैसी स्थिति होगी, उस पर निर्भर करेगा. इंटरनेशनल सेक्टर को दोबारा शुरू होने और सामान्य होने में एक से दो महीने लग सकते हैं. यूरोप और अमेरिका का अधिकतर हिस्सा Covid-19 महामारी से जूझ रहा है.

ये अभी तक साफ नहीं है कि भारतीय सरकार या अन्य देश बुरी तरह से प्रभावित इंडस्ट्री को कुछ वित्तीय पैकेज देने पर विचार कर रहे हैं या नहीं. एशिया में अन्यत्र भी यही हाल है. कई एयरलाइंस जो अब भी ऑपरेट कर रही हैं उन्होंने ए-380 विमानों को ग्राउंड कर दिया है. ये एयरलाइंस छोटे विमानों के जरिए डिमांड के मुताबिक ऑपरेट कर रही हैं और लागत बचा रही हैं.

सूना एयरस्पेस

सैटेलाइट तस्वीरों से जनवरी, फरवरी और मार्च में अहम एयरपोर्ट्स को देखने से भारतीय एयरस्पेस पर लॉकडाउन के पड़े असर को मापा जा सकता है.

देश के अहम एयरपोर्ट्स से दुनिया भर के बड़े शहर एविएशन रूट्स से जुड़े हैं. चेन्नई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से श्रीलंका, मलेशिया से सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया को उड़ान जाती हैं. इसके अलावा न्यूयॉर्क और कुछ यूरोपीय शहर भी फ्लाइट रूट से यहां से जुड़े हैं. इसी तरह कोच्चि इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी मिडिल ईस्ट, यूरोप और अन्यत्र फ्लाइट रूट्स से जुड़ा है.

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इस वक्त सिर्फ उन्हीं विमानों को उड़ान की इजाजत है जो मेडिकल उपकरण, मेडिकल स्टाफ, मिलिट्री/सुरक्षा अधिकारियों को ला-ले जा रहे हैं. एविएशन सेक्टर की देश में अब 15 अप्रैल पर नजरें लगी हुई हैं, तब उड़ानें सामान्य तौर पर शुरू हो पाती हैं या नहीं. ऐसे में आपको अपनी अगली फ्लाइट के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है.

(लेखक सिंगापुर स्थित ओपन सोर्स इंटेलीजेंस एनालिस्ट हैं)

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