मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय किए जाने के फैसले को राष्ट्रपति की ओर से आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है. राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने नाम बदलने की इस प्रक्रिया को अपनी मंजूरी दे दी है.
इस मंजूरी के बाद अब मानव संसाधन विकास मंत्रालय औपचारिक रूप से फिर से केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय बन गया है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 29 जुलाई को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को मंजूरी दी है. नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में ही मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलने की बात कही गई है. बता दें इस मंत्रालय का नाम पहले शिक्षा मंत्रालय था.
मानव संसाधन और विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय करने का गजट सोमवार रात प्रकाशित हो गया. इसकी अधिसूचना में राष्ट्रपति ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलने को मंजूरी दे दी है. इसमें लिखा है कि अब मानव संसाधन विकास मंत्रालय की जगह शिक्षा मंत्रालय लिखा जाएगा.
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पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में इसे मानव संसाधन विकास मंत्रालय नाम दिया गया था. पिछली बार यह नाम 1985 में बदला गया था. पिछली शिक्षा नीति वर्ष 1986 में बनाई गयी थी और 1992 में उसे संशोधित किया गया था.
केंद्र की मोदी सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी की गई नई शिक्षा नीति के अंतर्गत स्कूली शिक्षा में बड़े बदलाव किए गए हैं. स्कूली शिक्षा के लिए नए सिलेबस और नए सिस्टम का इंतजाम किया गया है. नए सिस्टम के हिसाब से छात्रों को चार वर्गों में बांटा में बांटा गया है. पहले वर्ग में 3 से 6 वर्ष की उम्र के छात्र होंगे. इन्हें प्री-प्राइमरी या प्ले स्कूल से लेकर कक्षा 2 तक की शिक्षा दी जाएगी. इसके बाद कक्षा 2-5 तक का पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा.
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इसके बाद कक्षा 5 से 8 और फिर अंत में 4 वर्ष के लिए यानी 9 से लेकर 12वीं तक के छात्रों को ध्यान में रखते हुए शैक्षणिक कार्यक्रम बनाया गया है.
केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा पाठ्यक्रम में लचीलापन होगा. उन्होंने कहा कि इसे ऐसे तैयार किया गया है कि विद्यार्थी तेज गति से नई चीजें सीख सकते हैं और इसमें पाठ्यक्रमों को चुनने का अवसर भी होगा.