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बोर्ड परीक्षाओं के बीच श्री श्री के कार्यक्रम पर बवाल, शिवराज चौहान नहीं जाएंगे

इस कार्यक्रम के आयोजन को लेकर छिड़ा विवाद जबलपुर हाईकोर्ट तक जा पहुंचा है. इस पर अदालत में बुधवार को सुनवाई होगी. बताया जाता है कि आयोजन स्थल को लेकर विवाद इतना गहराया कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान का आखिरी समय तक प्रोटोकाल निर्देश जारी नहीं हो पाया.

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आयोजन स्थल
आयोजन स्थल

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छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की सरहद पर स्थित बालाघाट जिले में एक सरकारी कार्यक्रम को लेकर बवाल मच गया है. इस कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह और आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर को शिरकत करनी है.

मगर बवाल ऐसा मचा कि शिवराज सिंह ने कार्यक्रम से अपना हाथ खींच लिया है. जबकि मुख्यमंत्री रमन सिंह का कार्यक्रम तय हो गया है. बालाघाट जिला मध्य प्रदेश के अंतर्गत आता है. ऐसे में वहां के मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में शामिल न होने को लेकर राजनीतिक खींचतान शुरू हो गई है.

इस कार्यक्रम के आयोजन को लेकर छिड़ा विवाद जबलपुर हाईकोर्ट तक जा पहुंचा है. इस पर अदालत में बुधवार को सुनवाई होगी. बताया जाता है कि आयोजन स्थल को लेकर विवाद इतना गहराया कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का आखिरी समय तक प्रोटोकाल निर्देश जारी नहीं हो पाया.

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दरअसल मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री गौरी शंकर बिसेन ने अपनी विधानसभा सीट बालाघाट में दो दिवसीय जैविक आध्यात्मिक कृषि मेले का आयोजन किया है. इस आयोजन में बतौर मुख्य अतिथि आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर को आमंत्रित किया गया है. लेकिन यह पूरा कार्यक्रम आयोजन स्थल को लेकर विवादों में घिर गया है.

क्या है विवाद की वजह

जिस जगह कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, वह सरकारी स्कूल का खुला मैदान है. इस मैदान के चारों ओर चार बड़े सरकारी स्कूल हैं, जहां दसवीं और बारहवीं की परीक्षा संचालित हो रही है. जबकि दूसरी ओर मध्यप्रदेश लोक संचालनालय का स्पष्ट आदेश है कि परीक्षा अवधि में ऐसे आयोजन स्कूल परिसर के आसपास न आयोजित किए जाएं.

सरकारी आदेश के बावजूद कार्यक्रम के आयोजन को लेकर एक स्थानीय व्यक्ति विशाल बिसेन ने जबलपुर हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर इस कार्यक्रम पर पाबंदी लगाने की मांग की है. उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि सरकारी आदेश की धज्जियां उड़ने से छात्रों को कई तरह की परेशानियां उठानी पड़ेगी. जबकि मंत्री जी को राजनीतिक फायदा होगा.

याचिकाकर्ता ने प्रशासन पर भी आरोप लगाया कि वह मंत्री के दबाव में सरकारी निर्देशों का पालन सुनिश्चित नहीं कर पा रहा है. फिलहाल लोगों की निगाह कार्यक्रम के आयोजन को लेकर हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हुई है. एक जानकारी के मुताबिक जैविक आध्यात्मिक कृषि मेले के आयोजन पर होने वाले खर्च का भार मध्यप्रदेश के कृषि विभाग ने उठाया है.

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जमीन सौंपने की तैयारी

इस इलाके की लगभग 300 एकड़ सरकारी जमीन श्री श्री रविशंकर की संस्था 'आर्ट ऑफ लिविंग' को सौंपने की भी तैयारी की जा रही है. इस सरकारी जमीन पर श्री श्री रविशंकर की संस्था जैविक खेती करने की कार्य योजना पर काम कर रही है. फिलहाल छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह का दौरा कार्यक्रम तय हो गया है. 

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