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भारत-चीन हजारों साल पुराने रिश्ते को करें और मजबूत: मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि भारत और चीन के रिश्तों की डोर हजारों साल से हमें अटूट बंधन में बांधे हुए है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे को बेहतर ढंग से समझना चाहिए.

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नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)
नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि भारत और चीन के रिश्तों की डोर हजारों साल से हमें अटूट बंधन में बांधे हुए है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे को बेहतर ढंग से समझना चाहिए.

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मोदी ने चीन की राजधानी बीजिंग में आयोजित ‘विजि़ट इंडिया इयर 2015’ कार्यक्रम के अवसर पर वीडियो संदेश में कहा, ‘भारत और चीन के रिश्तों की डोर कुछ ऐसी है, जो हजारों वर्षों से हमें अटूट बंधन में बांधे हुए है. हम दोनों की विरासत प्राचीन सभ्यता हैं, जिनके बीच गहरे संबंध भी हैं.’ इन दिनों विदेश मंत्री सुषमा स्वराज चीन की यात्रा पर हैं. प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हमारी पुरातन सभ्यताओं ने दुनिया को बहुत कुछ दिया है. आने वाली सदी एशिया की होगी. इस सदी में हमें एक बार फिर दुनिया को बहुत कुछ देना है, बहुत कुछ बताना है. इसके लिए जरूरी है कि हम एक-दूसरे को देखें, जानें, और समझें और यह तब होगा जब हम, एक-दूसरे के यहां और बड़ी संख्या में आएं-जाएं जनता के बीच आदान प्रदान बढ़ाएं.’

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इस साल मई में प्रधानमंत्री के रूप में चीन जा रहे मोदी ने कहा कि वह पहले भी चीन की यात्रा कर चुके हैं और उनका अनुभव बहुत ही अच्छा रहा. उन्होंने कहा कि किताबों में चीन के बारे में बहुत कुछ पढ़ा था, लेकिन चीन जाकर जो अनुभव मैंने पाया, वो अद्वितीय था. जब भी मैं चीन गया, मेरे मन में हमेशा एक कसक रह जाती थी कि काश मेरे पास ज्यादा समय होता तो मैं चीन के हर क्षेत्र में जाता, हर इलाके में जाता, अधिकतम लोगों से मिलता, बहुत कुछ देखता. उन्होंने कहा कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा के समय हमने फैसला किया था कि 2015 में चीन में ‘विजि़ट इंडिया इयर’ होगा और 2016 में ‘विजि़ट चाइना इयर’ होगा.

प्रधानमंत्री ने चीन के लोगों को भारत आने का न्यौता देते हुए कहा इस साल आप भारत आइए, और शुआन जांग तथा फ़ाहिआन के कदमों पर चलने का अनुभव कीजिए. बोध गया, सारनाथ और कुशीनगर जैसे अनगिनत स्थान हैं, आप इतिहास के पन्ने पलटिए. उन्होंने कहा, ‘इसके अलावा ‘योग की जन्मभूमि भारत में गंगा नदी के किनारे कुछ आसन लगाइए, भारत की संस्कृति, विविधता और सौन्दर्य का अनुभव कीजिए. अतिथि देवो भव:, यानी भारत में अतिथि भगवान का रूप माना जाता है.’

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मोदी ने अपने संदेश में कहा, 'चीन के साथ मेरा निजी रूप से भी एक विशेष नाता है और मैं उसे बहुत गहरा रिश्ता समझता हूं. मेरा जन्म जहां हुआ, वो गुजरात प्रदेश का एक छोटा सा गांव वडनगर, वो वह स्थान है जहां चीन के प्रसिद्द यात्री, शुआन जांग जब भारत आये थे, तो मेरे गांव भी आये थे. और कहते हैं कि बहुत लम्बे अरसे तक वो मेरे गांव में रहे थे.

मोदी ने कहा, 'जब शुआन जांग भारत से लौटे तब वे चीन में शुआन जांग शिआन क्षेत्र गए थे, और जब मुझे इस बात की जानकारी हुयी तो मुझे बड़ा आनंद हुआ कि वो राष्ट्रपति शी जिनपिंग का क्षेत्र है. इसे भी मैं एक बड़ा विशेष प्रकार का संकेत समझता हूं. उन्होंने कहा, ये सब सिर्फ इतिहास की बातें नहीं हैं. वर्तमान में भी हम उसी अटूट डोर से बंधे हैं. प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर सभी चीनवासियों को उनके नव वर्ष की शुभकामनाएं दीं.'

-इनपुट भाषा से

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