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'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' में भारत की छलांग, जानें कैसे तय होती है रैंकिंग

ठीक एक साल पहले जारी इस रैंकिंग में भारत 100वें स्थान पर था लेकिन बुधवार को विश्व बैंक ने भारत को 77वां स्थान दिया है. इस रैंक से कारोबार की सुगमता का अंदाजा लगाया जाता है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फोटो-आजतक आर्काइव)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फोटो-आजतक आर्काइव)

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विश्व बैंक की 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' रैंकिंग में भारत ने लंबी छलांग मारी है. 23 अंकों की छलांग लगाते हुए भारत 77वें पायदान पर पहुंच गया है. साल 2017 में भारत 100वें स्थान पर था जबकि बुधवार को उसे 77वां स्थान हासिल हुआ. विशेषज्ञों की मानें तो कारोबार करने के मामले में भारत की रैंकिंग में सुधार से कई क्षेत्रों में लाभ होगा.

क्या है ईज ऑफ डूइंग बिजनेस इंडेक्स

यह इंडेक्स विश्व बैंक जारी करता है. इसमें कई अलग-अलग पैरामीटर देखे जाते हैं. सभी पैरामीटर को मिलाकर यह देखा जाता है कि कारोबार करने में लोगों को कितनी आसानी है. यह भी देखा जाता है कि कारोबार करने में किस प्रकार की अड़चनें आती हैं.

किस आधार पर होता है फैसला

अलग-अलग देशों में कारोबार की सुगमता के आधार पर यह इंडेक्स तैयार होता है. रेग्युलेशन की स्थिति प्रमुखता से देखी जाती है. सरकारी रेग्युलेशन के चलते कारोबार आसान हुआ है या मुश्किल, इस पर गंभीरता से विचार किया जाता है. और भी कई फैक्टर हैं जिनको ध्यान में रखते हुए यह इंडेक्स तैयार होता है. इनमें प्रमुख हैं-कंस्ट्रक्शन परमिट, रजिस्ट्रेशन, लोन और टैक्स पेमेंट की मशीनरी. इन्हीं आधारों को ध्यान में रखकर देशों को इज ऑफ डूइंग बिजनेस इंडेक्स में स्थान जारी किया जाता है. 

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क्या कहा वित्त मंत्री जेटली ने

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि जब पीएम मोदी सत्ता में आए थे, तो उन्होंने कहा था कि हमको इस इंडेक्स में 50 पायदान पर आना है. हम इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. साल 2014 में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस इंडेक्स में भारत 142 और साल 2017 में 100वें पायदान था. अब इस इंडेक्स में भारत 77वें पायदान पर पहुंचा गया है. उन्होंने कहा कि कंस्ट्रक्शन परमिट के क्षेत्र में 129 अंकों का सुधार हुआ है, जबकि 'ट्रेडिंग अक्रॉस बॉर्डर्स' में 66 अंक, 'स्टार्टिंग अ बिजनेस' में 19 अंक, 'गेटिंग क्रेडिट' में 7 समेत अन्य क्षेत्र में सुधार हुआ है.

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