संयुक्त राष्ट्र विश्व खुशहाली रिपोर्ट में इस साल भारत का स्थान खिसक कर 140 वें स्थान पर पहुंच गया जो पिछले साल के मुकाबले सात पायदान नीचे है. जबकि फिनलैंड लगातार दूसरे साल भी इस मामले में शीर्ष पर रहा. खास बात ये है कि खुशहाल देशों की रैंकिंग में भारत, पड़ोसी देश पाकिस्तान से भी पिछड़ गया है.
संयुक्त राष्ट्र सतत विकास समाधान नेटवर्क ने बुधवार को यह रिपोर्ट जारी की. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2012 में 20 मार्च को विश्व खुशहाली दिवस घोषित किया था. संयुक्त राष्ट्र की ये सूची 6 कारकों पर तय की जाती है. इसमें आय, स्वस्थ जीवन प्रत्याशा, सामाजिक सपोर्ट, आजादी, विश्वास और उदारता शामिल हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में समग्र विश्व खुशहाली में गिरावट आई है. इसमें भारत की बात करें तो इस मामले में यहां निरंतर गिरावट के कारण रैंकिंग सात अंक फिसल गई है. भारत 2018 में इस मामले में 133 वें स्थान पर था जबकि इस वर्ष 140 वें स्थान पर रहा.
संयुक्त राष्ट्र की सातवीं वार्षिक विश्व खुशहाली रिपोर्ट, जो दुनिया के 156 देशों को इस आधार पर रैंक करती है कि उसके नागरिक खुद को कितना खुश महसूस करते हैं. इसमें इस बात पर भी गौर किया गया है कि किस देश में चिंता, उदासी और क्रोध सहित नकारात्मक भावनाओं में वृद्धि हुई है.
फिनलैंड को लगातार दूसरे वर्ष दुनिया का सबसे खुशहाल देश माना गया है. उसके बाद डेनमार्क, नॉर्वे, आइसलैंड और नीदरलैंड का स्थान है. रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान 67 वें, बांग्लादेश 125 वें और चीन 93 वें स्थान पर है.
युद्धग्रस्त दक्षिण सूडान के लोग अपने जीवन से सबसे अधिक नाखुश हैं, इसके बाद मध्य अफ्रीकी गणराज्य (155), अफगानिस्तान (154), तंजानिया (153) और रवांडा (152) हैं. दुनिया के सबसे अमीर देशों में से एक होने के बावजूद, अमेरिका खुशहाली के मामले में 19 वें स्थान पर है
2018 में भारत था 133वें स्थान पर
संयुक्त राष्ट्र टिकाऊ विकास समाधान नेटवर्क (एसडीएसएन) की 2018 वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट में खुशहाली के मामले में भारत की स्थिति दक्षिण एशिया क्षेत्रीय सहयोग संघ (दक्षेस) देशों और चीन से भी बुरी थी. 156 देशों में भारत का रैंक 133वां था. जबकि पिछले साल भी पड़ोसी देश पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश की स्थिति कहीं ज्यादा बेहतर थी. पाकिस्तान 75वां स्थान पर था, तो श्रीलंका 116वें और बांग्लादेश 115वें स्थान. 2018 की तुलना में पिछले साल 2017 में भारत की स्थिति ज्यादा अच्छी थी. वह पिछले साल 155 देशों में 122वें स्थान पर था. इससे पूर्व वर्ष 2016 में वह 118वें स्थान पर था.