भारत ने रविवार को उड़ीसा तट के व्हीलर द्वीप से परमाणु आयुध ले जाने में सक्षम अग्नि-3 मिसाइल का ‘‘सफल’’ परीक्षण किया जो तीन हजार किलोमीटर से अधिक की दूरी तक मार कर सकती है.
रक्षा सूत्रों ने बताया कि देश में ही विकसित सतह से सतह पर मार करने वाली इस मिसाइल को बालेश्वर से लगभग 100 किलोमीटर दूर धामरा के नजदीक सुबह करीब 10 बजकर 46 मिनट पर रेल मोबाइल लॉंचर से दागा गया. उन्होंने कहा कि परीक्षण सफल रहा और ‘‘मिशन के सभी मानक हासिल हो गए.’’ अग्नि-3 श्रृंखला का यह चौथा परीक्षण है.
सूत्रों ने कहा कि ब्यौरे के अध्ययन के लिए मिसाइल के समूचे प्रक्षेपण पथ पर विभिन्न टेलीमेट्री केंद्रों इलेक्ट्रो ऑप्टिक व्यवस्था और पोर्ट ब्लेयर में तट पर लगे आधुनिक राडारों तथा प्रभाव बिन्दु के नजदीक खड़े नौसेना के जहाजों के जरिए नजर रखी गई. अग्नि-3 मिसाइल दो चरणीय ठोस प्रक्षेपण व्यवस्था से संचालित होती है. इसकी लंबाई 17 मीटर और व्यास दो मीटर है. प्रक्षेपण वजन 50 टन है. यह अपने साथ डेढ़ टन सामग्री ले जा सकती है जो गर्मी से बचाव के लिए पूरी तरह काबर्न नाम के कवच से ढकी होती है.
यह चमकीली मिसाइल आधुनिक कंप्यूटर व्यवस्था के साथ आधुनिक नैविगेशन दिशा निर्देशन और नियंत्रण व्यवस्था से लैस है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के एक अधिकारी ने बताया कि उच्च कंपन तापीय और ध्वनि प्रभावों के लिए इसमें जबर्दस्त इलेक्ट्रानिक व्यवस्था का इस्तेमाल किया गया है. अग्नि-3 का पहला परीक्षण 9 जुलाई 2006 को किया गया था जो विफल रहा था लेकिन 12 अप्रैल 2007 और सात मई 2008 को किए गए दोनों परीक्षण सफल रहे थे.