भारत ने सोमवार को कुछ ही समय के अंतराल में परमाणु संपन्न तथा 350 किमी की रेंज तक सतह से सतह पर मार करने वाली 2 'पृथ्वी-2' प्रक्षेपास्त्रों के सफल प्रायोगिक परीक्षण किए.
पांच मिनट के अंतराल पर परीक्षण
ये परीक्षण बालेश्वर से करीब 15 किमी दूर चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (आईटीआर) से किए गए. रक्षा सूत्रों ने बताया कि सेना के नियमित परीक्षण के तौर पर सचल प्रक्षेपकों से, स्वदेश में निर्मित 'पृथ्वी-2' प्रक्षेपास्त्र के 2 परीक्षण प्रात: 10 बजकर 28 मिनट पर और 10 बजकर 33 मिनट पर किए गए.
प्रक्षेप पथों पर रखी गई नजर
सूत्रों ने बताया कि लंबी दूरी की एक बैटरी, बहु उद्देशीय रडारों और विभिन्न स्थानों पर इलेक्ट्रो-ऑप्टिक टेलीमेट्री स्टेशनों से प्रक्षेपास्त्र के प्रक्षेप पथों की निगरानी की गई. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के वैज्ञानिकों ने आईटीआर से किए गए इस प्रायोगिक परीक्षण को देखा. बंगाल की खाड़ी में जिन स्थानों पर इस प्रक्षेपण से प्रभाव पड़ सकता था, वहां नौसेना के पोत खड़े थे.
सेना में पहले से ही शामिल
परमाणु संपन्न 'पृथ्वी-2' प्रक्षेपास्त्र को सैन्य बलों में पहले ही शामिल किया जा चुका है. सूत्रों के अनुसार, रणनीतिक बल कमान के विशेष समूह की सैन्य यूनिटें इनका रखरखाव करती हैं. सूत्रों ने बताया कि 2 इंजन वाले 'पृथ्वी-2' प्रक्षेपास्त्र की लंबाई 9 मीटर और चौड़ाई 1 मीटर है. नौवहन प्रणालियों से सुसज्जित यह प्रक्षेपास्त्र शत्रु के प्रक्षेपास्त्रों को चकमा दे सकता है.
तरल व ठोस, दोनों ईंधनों से संचालित
इस प्रक्षेपास्त्र की मारक क्षमता अलग-अलग है. यह तरल और ठोस, दोनों प्रकार के ईंधन से संचालित हो सकती है तथा अपने साथ परंपरागत और परमाणु पेलोड-दोनों को ही ले जाने में सक्षम है. इसके प्रायोगिक परीक्षण के दौरान रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार वी के सारस्वत, शीर्ष वैज्ञानिक और सेना के अधिकारी मौजूद थे. 'पृथ्वी-2' का अंतिम परीक्षण इस वर्ष 15 अप्रैल को चांदीपुर में ही किया गया था.