वैश्विक वित्तीय संकट का प्रभाव भारत पर भी पड़ेगा, लेकिन मजबूत बुनियाद और सक्रिय मौद्रिक नीति प्रबंधन के बल पर वह इस संकट से उबर जाएगा. विश्व बैंक की एक अध्ययन रिपोर्ट में यह बात कही गई है.
वैश्विक वित्तीय संकट: दक्षिण एशिया पर प्रभाव नामक अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक वित्तीय बाजारों के संक्रमित प्रभावों से सबसे बड़ी भारत की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है. इसका प्रभाव संस्थागत और सीधे विदेशी निवेश से पूंजी के निकलने के रूप में देखा जा रहा है.
इसमें कहा गया है कि संकटग्रस्त अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के कारण घरेलू वित्तीय संस्थानों के प्रभावित होने से भारतीय अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है.
इसका प्रमाण शेयर बाजारों में हुए भारी नुकसान और विदेशी पूंजी के प्रवाह में कमी है. यद्यपि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन खतरों को मजबूत अर्थव्यवस्था ठीक तरीके से विदेशी कर्ज का प्रबंधन, उच्च बचत दर, वित्तीय क्षेत्र की मजबूत स्थिति और सक्रिय मौद्रिक नीति प्रबंधन के बल पर वह इस संकट से उबर जाएगा.