कूलभूषण जाधव को पाकिस्तान कोर्ट के जरिए फांसी कि सजा सुनाने के बाद, पाकिस्तान की जेल में बंद अहमदाबाद के रहने वाले कुलदीप यादव के परिवार की चिंता और बढ़ गई है. दरअसल कुलदीप यादव 1997 से पाकिस्तान की लाहौर जेल में बंद है. पाकिस्तान ने उस पर भी जासूसी का आरोप लगाया है.
आज 20 साल बाद भी अहमदाबाद की रहने वाली रेखा यादव अपनी भाई की तस्वीर देखती हैं तो उनकी आंखों से आंसू छलक आते हैं. दरअसल, रेखा लगातार पिछले 20 सालों से अपने भाई को पाकिस्तान से छुड़वाने की कोशिश कर रही हैं. लेकिन, हर जगह से मायूसी के अलवा कुछ नहीं मिलता. चाहे कांग्रेस की सरकार हो या बीजेपी की रेखा ने हर बार सरकार के दरवाजे खटखटाए हैं लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगती रही.
रेखा यादव का कहना है कि, पाकिस्तान की जेल में बंद कूलभूषण जाधव के फांसी की खबर जब से आई है उनका दिल बैठ गया है. उन्हें कहीं ना कहीं डर सताने लगा है कि कहीं उनके भाई के साथ भी कुछ ऐसा ना हो जाए.
मेरे भाई का क्या हुआ होगा
अहमदाबाद में 'आजतक' से हुई बातचीत में कुलदीप यादव की बहन रेखा यादव ने कहा, "कूलभूषण जाधव की खबर जब से आई है, तब से एक डर सा बैठ गया है कि मेरे भाई का क्या हुआ होगा. चाहे कांग्रेस हो या बीजेपी हो हमने हर किसी से अपने भाई के लिए गुहार लगाई है, लेकिन कोई भी मेरे भाई को छुड़ा नहीं पाया."
नौकरी के लिए निकला था कुलदीप यादव
कुलदीप यादव 1994 में अहमदाबाद से नौकरी के लिए जा रहा हुं ऐसा कह कर निकले थे. हालांकि बाद में तीन साल तक उनकी कोई खबर नहीं मिली और फिर अचानक 1997 में पाकिस्तान से छूटा एक मछुआरा उनके घर पहुंचा और उन्होंने कुलदीप का लेटर उनकी मां को दिया तब परिवार वालों को पता चला कि कुलदीप पाकिस्तान कि लाहौर जेल में बंद है. इसके बाद लगातार परिवार वाले सरकार के चक्कर काट रहे हैं कि कोई उनकी मदद करे और उनका भाई पाकिस्तान की जेल से रिहा हो. पाकिस्तान ने कुलदीप पर जासूसी का आरोप लगाया है.
2021 में रिहा होगा
कुलदीप के परिवार वाले तो ये भी नहीं समझ पा रहे हैं कि उनका बेटा भारतीय जासूस कैसे बन गया जबकि वो ज्यादा पढ़ा-लिखा भी नहीं था. परिवार को जो अंतिम संदेश सरकार से मिला था वो यही था कि कुलदीप को पाकिस्तान में 25 साल की सजा सुनाई गई है और वो 2021 में रिहा होगा.