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डीम्ड दर्जा मामले में घालमेल, एचआरडी और यूजीसी पर अंगुली उठी

मानव संसाधन विकास मंत्रालय और यूजीसी की ओर उंगली उठाते हुए नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) ने न्यूनतम अर्हता पूरा भी नहीं करने वाले चार निजी संस्थानों को डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा देने में अनियमितता पकड़ी है.

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मानव संसाधन विकास मंत्रालय और यूजीसी की ओर उंगली उठाते हुए नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) ने न्यूनतम अर्हता पूरा भी नहीं करने वाले चार निजी संस्थानों को डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा देने में अनियमितता पकड़ी है.

स्वायत्त निकायों के संबंध में संसद में आज पेश अपनी रिपोर्ट में कैग ने कहा कि विशेषज्ञ समितियों की सिफारिशों के खिलाफ जाते हुए भी मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एचआरडी) ने हैदराबाद के इंस्टीट्यूट आफ चार्टर्ड फाइनेंशियल एनालिस्ट आफ इंडिया (आईसीएफएआई), फरीदाबाद के मानव रचना इंटरनेशनल विश्वविद्यालय, इलाहाबाद में नेहरू ग्राम भारती विश्वविद्यालय और राजस्थान के मोदी इंस्टीट्यूट आफ एजुकेशन एंड रिसर्च को पक्का डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा दे दिया.

नियम कायदों के मुताबिक पक्का डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा केवल उन्हीं संस्थानों को दिया जाता है जिनकी स्थापना के कम से कम 10 वर्ष पूरे हो गये हों. उभरते हुए क्षेत्र में उत्कृष्ट पाठ्यक्रम उपलब्ध कराने वाले और स्थापना के पांच साल पूरे कर चुके संस्थानों को नवीन वर्ग के तहत अस्थायी डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा दिया जा सकता है.

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डीम्ड के हर मामले में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग एक विशेषज्ञ समिति गठित करता है . यह समिति संस्थानों को दौरा करती है और समुचित दर्जा के लिए सिफारिश करती है. इसके बाद डीम्ड विश्वविद्यालय यूजीसी सिफारिशों पर विचार करता है और डीम्ड विश्वविद्यालय के दर्जा के लिए सिफारिशों को मानव संसाधन विकास मंत्रालय को प्रेषित करता है.

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